गोबरी नदी पर बना रपटा तेज बहाव में धराशायी, ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, 10 दिन का अल्टीमेटम, कार्रवाई नहीं हुई तो NH-43 पर चक्काजाम की चेतावनी….
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संपादकीय रिपोर्ट / दीपक गुप्ता…..✍️
सूरजपुर/भैयाथान। गोबरी नदी पर हाल ही में लाखों रुपये की लागत से निर्मित रपटा पुल महज 15 दिनों के भीतर तेज बहाव में बह जाने का मामला सामने आया है। रपटा के इस तरह धराशायी होने के बाद निर्माण की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। बुधवार को जनप्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर रेना जमील को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने तथा निर्माण कार्य के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की।
ग्रामीणों ने प्रशासन को 10 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि इस अवधि में मामले में ठोस कार्रवाई शुरू नहीं हुई और आवागमन बहाल करने के लिए काम प्रारंभ नहीं कराया गया, तो वे NH-43 पर धरना-प्रदर्शन एवं चक्काजाम करने को मजबूर होंगे।
पहले पुराना पुल क्षतिग्रस्त हुआ, फिर नया रपटा भी नहीं टिक पाया :-
ग्रामीणों के अनुसार गोबरी नदी पर बना मुख्य पुल 30 जून 2025 को क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद लंबे समय तक क्षेत्र के लोगों को आवागमन की समस्या का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने जनसहयोग से रपटा निर्माण की पहल की, जिसके बाद प्रशासन की ओर से लाखों रुपये की शासकीय स्वीकृति प्रदान की गई।
लेकिन निर्माण पूरा होने के महज 15 दिन बाद ही तेज बारिश और नदी के बहाव में रपटा बह जाने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों और गुणवत्ता के अनुरूप हुआ होता, तो पहली ही बड़ी बारिश में पूरा ढांचा इस तरह क्षतिग्रस्त नहीं होता। हालांकि, वास्तविक कारणों का निर्धारण तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
भुगतान रोके जाने की चर्चा, अब विशेषज्ञ जांच की मांग :-
ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में निर्मित रपटा की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने के बाद संबंधित ठेकेदार के भुगतान को रोके जाने की जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री, डिजाइन, नींव, तकनीकी मानकों और निर्माण प्रक्रिया की विशेषज्ञ टीम से जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि रपटा इतनी कम अवधि में क्यों बह गया।
कलेक्टर ने 15 दिन में काम शुरू कराने का दिया आश्वासन :-
कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर रेना जमील के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं। ग्रामीणों के अनुसार कलेक्टर ने उन्हें 15 दिनों के भीतर मौके पर काम शुरू कराने का आश्वासन दिया है। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि मौके पर वास्तविक काम शुरू होता हुआ दिखाई देना चाहिए। साथ ही रपटा निर्माण में यदि किसी स्तर पर लापरवाही या तकनीकी खामी सामने आती है तो जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।
आवागमन ठप, स्कूली बच्चों और मरीजों की बढ़ी परेशानी :-
रपटा बह जाने से क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हुआ है। किसानों, मजदूरों, स्कूली बच्चों और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी चिंता आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने को लेकर है। ग्रामीणों ने 108 एंबुलेंस सहित आवश्यक सेवाओं के आवागमन को लेकर भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है।
जनपद सभापति बोले—समय पर काम नहीं हुआ तो ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठूंगा :-
जनपद सभापति राजू कुमार गुप्ता ने कहा कि प्रशासन द्वारा दिए गए समय के भीतर यदि मौके पर काम शुरू नहीं हुआ तो वे ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठेंगे। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता लंबे समय से आवागमन की समस्या झेल रही है और अब स्थायी समाधान की जरूरत है।
ग्रामीणों ने भी स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच, दोष सामने आने पर जिम्मेदारी तय करने और सुरक्षित आवागमन बहाल करने की है।
अब देखना होगा कि प्रशासन द्वारा दिए गए 15 दिनों के आश्वासन के भीतर धरातल पर काम कितना आगे बढ़ता है और रपटा के बहने के वास्तविक कारणों को तकनीकी जांच के माध्यम से सामने लाया जाता है या नहीं।