बदहाल सड़कों से राहगीर परेशान, दुकानदारों का कारोबार प्रभावित; जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल…?
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संपादकीय रिपोर्ट / दीपक गुप्ता…..✍️
सूरजपुर। मानसून की विदाई के साथ ही सूरजपुर शहरवासियों की मुश्किलें खत्म होने के बजाय एक नए रूप में सामने आती दिखाई दे रही हैं। बारिश के दिनों में जलभराव और गड्ढों से परेशान रहे शहर की सड़कों पर अब तेज धूप निकलते ही धूल के गुबार उठने लगे हैं। प्रमुख मार्गों से गुजरने वाले भारी वाहनों के पीछे उड़ती बारीक धूल राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बन रही है।
स्थिति यह है कि कई स्थानों पर वाहन गुजरते ही सड़क के आसपास धूल का ऐसा गुबार उठता है कि कुछ दूरी तक सामने का रास्ता स्पष्ट दिखाई देना मुश्किल हो जाता है। इससे वाहन चालकों और पैदल राहगीरों के सामने दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।
गड्ढों से धूल तक पहुंची समस्या :-
बरसात के दौरान रिंग रोड सहित शहर के कई मार्गों पर गड्ढों और जलभराव की समस्या सामने आती रही। स्थानीय स्तर पर कई जगहों पर तत्काल राहत के लिए मिट्टी-मोरम अथवा अन्य सामग्री डाले जाने की बात सामने आती रही, लेकिन बारिश के बाद यही सामग्री सूखकर सड़क पर धूल का कारण बन रही है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या हर साल सड़कों की समस्या का स्थायी समाधान करने के बजाय केवल अस्थायी मरम्मत तक ही व्यवस्था सीमित रहेगी?
सड़क किनारे दुकानदारों की बढ़ी परेशानी :-
सड़क किनारे कारोबार करने वाले व्यापारियों के लिए भी धूल बड़ी परेशानी बनती जा रही है। दुकानों में रखा सामान धूल से प्रभावित हो रहा है। दुकानदारों का कहना है कि बार-बार सफाई करने के बावजूद कुछ ही देर में सामान और दुकान के आसपास फिर धूल जम जाती है।
धूल और खराब सड़क की वजह से ग्राहकों के आवागमन पर भी असर पड़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में छोटे व्यापारियों के लिए सड़क की समस्या केवल आवागमन तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि उनके रोजमर्रा के कारोबार से भी जुड़ गई है।
स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता :-
सड़क से उठने वाली धूल को लेकर नागरिकों में स्वास्थ्य संबंधी चिंता भी बढ़ रही है। लगातार धूल के संपर्क में आने से आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी और एलर्जी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। विशेष रूप से बच्चे, बुजुर्ग और पहले से सांस संबंधी समस्या वाले लोगों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।
ऐसे में शहर की सड़कों पर नियमित साफ-सफाई, धूल नियंत्रण और आवश्यक स्थानों पर पानी के छिड़काव जैसी व्यवस्थाओं की जरूरत महसूस की जा रही है।
विकास के दावों के बीच बुनियादी सुविधाओं पर सवाल….? :-
शहर के नागरिकों का कहना है कि सड़क निर्माण और मरम्मत पर लगातार राशि खर्च होने के बावजूद यदि कुछ ही समय बाद सड़कें फिर गड्ढों और धूल की समस्या में घिर जाएं तो निर्माण की गुणवत्ता, निगरानी और रखरखाव की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि किसी भी निर्माण कार्य में गुणवत्ता संबंधी आरोपों की पुष्टि तकनीकी जांच और संबंधित अभिलेखों के आधार पर ही की जा सकती है। ऐसे में नागरिकों की मांग है कि जिन सड़कों की स्थिति खराब है, वहां संबंधित विभाग तकनीकी निरीक्षण कराकर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करे।
आखिर कब मिलेगी स्थायी राहत….? :-
सूरजपुर की सड़कों की मौजूदा स्थिति ने एक बार फिर शहर की सड़क व्यवस्था और उसके रखरखाव को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। नागरिकों का सवाल सीधा है—बारिश में गड्ढे और धूप में धूल के गुबार आखिर कब तक शहर की पहचान बने रहेंगे?
जनता को तत्काल राहत के साथ-साथ ऐसी सड़क व्यवस्था की जरूरत है, जिसमें बार-बार की अस्थायी मरम्मत के बजाय गुणवत्तापूर्ण निर्माण, नियमित रखरखाव, जल निकासी और धूल नियंत्रण पर स्थायी रूप से काम हो।
अब देखना यह होगा कि संबंधित प्रशासन और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं और सूरजपुरवासियों को गड्ढों तथा धूल के इस चक्र से स्थायी राहत कब मिलती है।