पहली ही बारिश में कई जगह टूटी नहर, घटिया निर्माण का आरोप; ग्रामीणों ने कलेक्टर समेत जल संसाधन विभाग के अधिकारियों से की शिकायत….
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संपादकीय रिपोर्ट / दीपक गुप्ता…..✍️
सूरजपुर/भैयाथान। विकासखंड भैयाथान अंतर्गत ग्राम पंचायत बैजनाथपुर ‘ब’ में जलाशय की नहर निर्माण को लेकर ग्रामीणों और किसानों ने निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों द्वारा 21 सितंबर 2026 को जिला कलेक्टर सूरजपुर के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर नहर निर्माण में कथित अनियमितता, घटिया सामग्री के उपयोग तथा बाद में की जा रही थूक-पॉलिश मरम्मत की जांच कराने की मांग की गई है।
शिकायत में ग्रामीणों ने बताया है कि बैजनाथपुर ‘ब’ जलाशय की नहर का निर्माण लगभग ₹2 करोड़ 22 लाख 79 हजार रुपये की लागत से कराया गया है और कार्य 30 जून 2026 को पूर्ण बताया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण पूरा होने के कुछ ही समय बाद पहली बारिश में नहर के कई हिस्सों में दरारें और टूट-फूट दिखाई देने लगी।
निर्माण के दौरान भी शिकायत करने का दावा :-
ग्रामीणों ने शिकायत में कहा है कि नहर निर्माण के दौरान ही करीब 50 से 60 किसानों एवं ग्रामीणों ने घटिया निर्माण और कथित भ्रष्टाचार को लेकर आपत्ति जताई थी। शिकायत के अनुसार, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में भी शिकायत की गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा शिकायत को निराधार बताते हुए बिना गुणवत्तापूर्ण जांच के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया गया।
खबर प्रकाशित होने के बाद मरम्मत शुरू करने का आरोप :-
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि मामले से संबंधित खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर नहर की मरम्मत शुरू कराई गई। ग्रामीणों का कहना है कि मरम्मत के नाम पर कई स्थानों पर केवल ऊपर से सीमेंट का घोल लगाकर थूक-पॉलिश जैसी मरम्मत की जा रही है। उनका कहना है कि यदि नहर की वास्तविक तकनीकी खामियों को दूर नहीं किया गया तो ऐसी मरम्मत ज्यादा समय तक टिकाऊ नहीं होगी।
“चलने पर धम्म-धम्म की आवाज आती है” :-
ग्रामीणों ने नहर की वर्तमान स्थिति को लेकर शिकायत में गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि नहर के ऊपर से चलने पर कई स्थानों पर धम्म-धम्म की आवाज सुनाई देती है और नीचे से खोखलापन महसूस होने की बात कही गई है। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, मौजूदा स्थिति को देखते हुए उन्हें आशंका है कि नहर भविष्य में भी क्षतिग्रस्त हो सकती है।
ग्रामीणों ने रखीं चार प्रमुख मांगें :-
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए चार प्रमुख मांगें रखी हैं—
1. नहर में प्रयुक्त सीमेंट, सरिया, गिट्टी आदि निर्माण सामग्री के नमूने लेकर लैब से जांच कराई जाए।
2. शिकायत में आरोपित संबंधित कार्यपालन अभियंता एवं एसडीओ/सब इंजीनियर के विरुद्ध जांच एवं आवश्यक कार्रवाई की जाए।
3. दोषी पाए जाने वाले ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की जाए।
4. नहर की चल रही थूक-पॉलिश मरम्मत तत्काल रोकी जाए तथा पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराकर गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री, जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को भी भेजी प्रतिलिपि :-
शिकायत की प्रतिलिपि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता, अधीक्षण अभियंता जल संसाधन मंडल अंबिकापुर तथा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) भैयाथान को भी भेजी गई है।
शिकायत पत्र के अंत में ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि नहर का गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित नहीं किया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति :-
ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। ऐसे में नहर निर्माण की गुणवत्ता, इस्तेमाल की गई सामग्री तथा मरम्मत कार्य की वास्तविक स्थिति तकनीकी जांच और संबंधित विभाग की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है।