17 महीने में ही उखड़ गई 20 लाख रुपए की सीसी सड़क….

डीएमएफ मद से बनी बांसापारा की सड़क की ऊपरी परत जगह-जगह गायब, खुले में निकली गिट्टियां; ग्रामीणों ने तकनीकी जांच की उठाई मांग…

CG Samachar24.in

संपादकीय रिपोर्ट
दीपक गुप्ता…..✍️

सूरजपुर/भैयाथान। सरकारी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़क और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। लेकिन निर्माण के कुछ ही समय बाद यदि सड़क की हालत खराब होने लगे, तो निर्माण की गुणवत्ता और उसकी निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ऐसा ही मामला सूरजपुर जिले के भैयाथान विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बांसापारा में सामने आया है।

यहां डीएमएफ मद से करीब 20 लाख रुपये की लागत से निर्मित सीसी सड़क निर्माण पूर्ण होने के लगभग 17 माह के भीतर ही जगह-जगह से उखड़ती दिखाई दे रही है। सड़क की ऊपरी परत कई हिस्सों में क्षतिग्रस्त हो गई है और गिट्टियां खुले तौर पर बाहर निकल आई हैं।

दुर्गा पंडाल से कुम्हारपारा पहुंच मार्ग का है मामला :-

मामला दुर्गा पंडाल (मंदिर) से कुम्हारपारा पहुंच मार्ग का बताया जा रहा है। उपलब्ध सूचना पट्ट के अनुसार इस सड़क के निर्माण के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से 20 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दर्ज है।

सूचना पट्ट में कार्य की शुरुआत 4 नवंबर 2024 तथा कार्य पूर्ण होने की तिथि 2 अप्रैल 2025 दर्ज है। कार्य का मूल्यांकन 19 लाख 99 हजार 535 रुपये बताया गया है। निर्माण एजेंसी के रूप में ग्राम पंचायत बांसापारा का उल्लेख है।

ऊपरी सतह उखड़ी, सड़क पर गिट्टियां बनीं परेशानी :-

मौके की तस्वीरों में सड़क की सतह पर जगह-जगह छोटे-बड़े पत्थर और गिट्टियां बाहर निकली हुई दिखाई दे रही हैं। कई हिस्सों में सड़क की ऊपरी परत घिसी अथवा उखड़ी हुई नजर आती है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि लंबे समय तक आवागमन सुगम रहेगा, लेकिन अपेक्षाकृत कम अवधि में सड़क की सतह खराब होने लगी। इससे सड़क के टिकाऊपन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

दोपहिया वाहन चालकों के लिए बढ़ी परेशानी :-

सड़क की उखड़ी सतह और बाहर निकली गिट्टियों के कारण दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। असमतल सड़क पर वाहन चलाते समय संतुलन बिगड़ने की आशंका बनी रहती है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं की गई तो बारिश और लगातार आवागमन के कारण इसकी स्थिति और खराब हो सकती है।

निर्माण सामग्री और तकनीकी मानकों के जांच की मांग :-

सड़क की मौजूदा स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की जांच की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क की मोटाई, बेस निर्माण, सीमेंट-गिट्टी का अनुपात, निर्माण प्रक्रिया और उपयोग की गई सामग्री की तकनीकी जांच होनी चाहिए।

उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मापदंडों के अनुरूप हुआ है, तो इतनी कम अवधि में सड़क की ऊपरी सतह खराब होने के कारणों को स्पष्ट किया जाना चाहिए।

तकनीकी जांच के बाद ही सामने आएगी वास्तविक वजह :-

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित विभाग द्वारा सड़क का स्थल निरीक्षण एवं तकनीकी परीक्षण कराया जाए। साथ ही निर्माण से संबंधित अभिलेखों, माप पुस्तिका, गुणवत्ता परीक्षण और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की भी जांच की जाए।

यदि जांच में निर्माण कार्य में तकनीकी अथवा गुणवत्ता संबंधी कमी सामने आती है, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई की मांग भी ग्रामीणों ने की है।

20 लाख की सड़क, 17 महीने में सवालों के घेरे में :-

सरकारी धन से सड़क का उद्देश्य ग्रामीणों को वर्षों तक सुरक्षित और सुगम आवागमन उपलब्ध कराना होता है। ऐसे में करीब 20 लाख रुपये की लागत वाली बांसापारा की सीसी सड़क का इतनी कम अवधि में जगह-जगह से उखड़ना निश्चित रूप से जांच का विषय बन गया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सड़क की ऊपरी परत इतनी जल्दी क्यों खराब हुई? क्या निर्माण के दौरान निर्धारित तकनीकी मापदंडों का पालन हुआ था? क्या निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच की गई थी? इन सवालों का स्पष्ट जवाब तकनीकी जांच और संबंधित विभाग की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही मिल सकेगा।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराकर सड़क की गुणवत्ता की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है।

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