तमोर पिंगला एलीफेंट रिजर्व में हाथी का तांडव, इको वाहन क्षतिग्रस्त….

चालक ने भागकर बचाई जान, ग्रामीणों में दहशत और वन विभाग के खिलाफ लोगों का आक्रोश…….

CG Samachar 24.in

संचालक :- दीपक गुप्ता…✍️

सूरजपुर। जिले के तमोर पिंगला एलीफेंट रिजर्व प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। वन परिक्षेत्र घुई अंतर्गत ग्राम भेलकच्छ में आज गुरुवार सुबह एक आक्रामक जंगली हाथी कबरा कान ने जमकर तांडव मचाया। हाथी ने अचानक एक इको वाहन पर हमला कर उसे बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। गनीमत रही कि वाहन चालक त्रिलोचन सिंह ने सूझबूझ दिखाते हुए किसी तरह मौके से भागकर अपनी जान बचा ली। यदि चालक समय रहते वहां से नहीं निकल पाता, तो बड़ा हादसा हो सकता था।

हाथियों की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल….? :-

एक ओर तमोर पिंगला को एलीफेंट रिजर्व के रूप में विकसित किए जाने और हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर आबादी और आवागमन वाले क्षेत्रों में हाथियों की मौजूदगी लगातार चिंता का विषय बनी हुई है।

सुबह के समय वाहन से गुजर रहे त्रिलोचन सिंह पर अचानक हुए हमले ने क्षेत्र में वन्य हाथियों के बढ़ते खतरे को उजागर कर दिया है। घटना के बाद भेलकच्छ सहित आसपास के गांवों में भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की मौजूदगी के बीच उन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ आक्रोश :-

घटना के बाद ग्रामीणों में वन विभाग और तमोर पिंगला एलीफेंट रिजर्व प्रबंधन के अधिकारियों के खिलाफ भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि हाथियों की गतिविधियों पर समय रहते प्रभावी निगरानी रखी जाती और प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय गश्त बढ़ाई जाती, तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता था।

ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से तत्काल प्रभाव से ठोस कदम उठाने की मांग की है। इनमें

– हाथी कबरा कान सहित अन्य हाथियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी।
– हाथी प्रभावित मार्गों और बस्तियों के आसपास वन अमले की सक्रिय गश्त बढ़ाना।
– ग्रामीणों को हाथियों की लोकेशन और संभावित खतरे की समय पर सूचना देना।
– क्षतिग्रस्त इको वाहन का पीड़ित चालक को नियमानुसार शीघ्र मुआवजा दिलाना।
– भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करना।

ग्रामीणों का कहना है कि केवल कागजी बैठकों और दावों से समस्या का समाधान नहीं होगा। जमीनी स्तर पर वन अमले की सक्रियता और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।

बड़ा सवाल: क्या बड़ी जनहानि का इंतजार कर रहा वन विभाग…? :-

घटना ने वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या वन विभाग किसी बड़ी जनहानि का इंतजार कर रहा है? एलीफेंट रिजर्व होने के बावजूद आम जनता की सुरक्षा को लेकर प्रभावी व्यवस्था क्यों नजर नहीं आ रही है? हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में समय रहते लोगों को सतर्क क्यों नहीं किया जा रहा है..?

अब देखना होगा कि इस घटना के बाद वन विभाग और तमोर पिंगला एलीफेंट रिजर्व प्रबंधन ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।

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