नरोला राशन दुकान में 348 क्विंटल चावल की कथित कमी, समिति पर हुई कार्रवाई…..

चना-शक्कर के स्टॉक में भी अनियमितता का आरोप, ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की……

CG Samachar24.in

संचालक :- दीपक गुप्ता….✍️

सूरजपुर। विकासखंड प्रतापपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत नरोला की शासकीय उचित मूल्य दुकान में राशन वितरण को लेकर कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। जांच के दौरान 348 क्विंटल चावल के साथ चना और शक्कर के स्टॉक में कथित कमी पाए जाने के बाद संबंधित दुकान संचालित करने वाली समिति/समूह के खिलाफ कार्रवाई की गई है। फिलहाल राशन वितरण की व्यवस्था धोनधा की शासकीय उचित मूल्य दुकान से संबद्ध कर दी गई है।

मामले के सामने आने के बाद नरोला सहित आसपास के गांवों में नाराजगी का माहौल है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जुलाई और अगस्त माह का राशन कई पात्र हितग्राहियों को नहीं मिला। वहीं, कुछ ग्रामीणों ने फर्जी तरीके से अंगूठा लगवाकर राशन नहीं देने जैसी गंभीर शिकायतें भी जांच अधिकारियों के समक्ष रखी हैं।

जांच में सामने आई स्टॉक की कमी :-

शिकायत मिलने के बाद खाद्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। अधिकारियों के निर्देश पर फूड इंस्पेक्टर शशि जायसवाल मौके पर पहुंचीं और उचित मूल्य दुकान में उपलब्ध खाद्यान्न स्टॉक, वितरण पंजी सहित संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण किया।

जांच के दौरान 348 क्विंटल चावल के साथ चना और शक्कर के स्टॉक में भी कथित कमी और अनियमितता सामने आने की बात कही जा रही है। इसके बाद संबंधित समिति के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रथम नोटिस जारी किया गया है।

फूड इंस्पेक्टर शशि जायसवाल के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों के निर्देश पर संबंधित समिति के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जांच अभी जारी है तथा स्टॉक, वितरण व्यवस्था और दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है। संबंधित पक्ष से जवाब लिया जाएगा और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

भाजपा मंडल अध्यक्ष का नाम सामने आने से राजनीतिक सरगर्मी :-

मामले में भाजपा मंडल अध्यक्ष गोविंदपुर का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक चर्चा भी तेज हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि समिति के संचालन में उनकी भूमिका रही है और शिकायत या विवाद की स्थिति में वे समिति का बचाव करते रहे हैं।

हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम सामने आना अपने आप में उसकी दोषसिद्धि नहीं है। भाजपा मंडल अध्यक्ष अथवा किसी अन्य व्यक्ति की वास्तविक भूमिका जांच में सामने आने वाले दस्तावेजों, रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।

ग्रामीणों ने उठाए गंभीर सवाल…? :-

ग्रामीणों का कहना है कि राशन गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि बड़े पैमाने पर खाद्यान्न की कमी या वितरण में अनियमितता हुई है तो इसकी जांच केवल समिति तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि राशन के उठाव से लेकर भंडारण, वितरण और निगरानी की पूरी व्यवस्था की जांच होनी चाहिए।

ग्रामीणों ने राशन उठाव और वितरण से संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक करने, पात्र हितग्राहियों को उनका पूरा राशन उपलब्ध कराने तथा जांच में दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

कलेक्टर ने कहा—दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा :-

मामले को लेकर सूरजपुर कलेक्टर रेना जमील ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि गरीबों के राशन में किसी भी प्रकार की हेराफेरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संबंधित समिति के खिलाफ कार्रवाई करते हुए प्रथम नोटिस जारी किया गया है। जवाब प्राप्त होने के बाद नियमानुसार विस्तृत जांच की जाएगी।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज कराने की कार्रवाई भी की जाएगी। मामले में यदि एक से अधिक लोग संयुक्त रूप से जिम्मेदार पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।

अब अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर :-

नरोला राशन मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 348 क्विंटल चावल सहित चना और शक्कर की कथित कमी के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है? क्या जांच केवल दुकान संचालित करने वाली समिति तक सीमित रहेगी या राशन उठाव, वितरण, निगरानी और संबंधित जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी गहराई से जांच होगी?

प्रतापपुर क्षेत्र की विधायक शकुंतला पोर्ते के विधानसभा क्षेत्र से जुड़े इस मामले में राजनीतिक संरक्षण को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की अंतिम जांच रिपोर्ट पर है। ग्रामीणों की मांग है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो और किसी भी राजनीतिक दबाव के बिना कार्रवाई की जाए।

फिलहाल विभागीय जांच जारी है। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि राशन की कथित कमी और अनियमितताओं के लिए किन लोगों की जिम्मेदारी तय होती है और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

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