रेडी-टू-ईट की गुणवत्ता पर सवाल, पूरे प्रतापपुर विकासखंड की जांच की मांग करसी-मकनपुर से शुरू हुआ विवाद पहुंचा प्रशासन तक, जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने सौंपा हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन….
रेडी-टू-ईट की गुणवत्ता पर सवाल, पूरे प्रतापपुर विकासखंड की जांच की मांग करसी-मकनपुर से शुरू हुआ विवाद पहुंचा प्रशासन तक, जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने सौंपा हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन….
सूरजपुर/प्रतापपुर। जिले के प्रतापपुर विकासखंड में गर्भवती महिलाओं, माताओं एवं मासूम बच्चों को वितरित किए जाने वाले रेडी-टू-ईट पोषण आहार की गुणवत्ता को लेकर उठी शिकायत अब बड़ा प्रशासनिक मुद्दा बनती जा रही है। करसी-मकनपुर से शुरू हुआ विवाद अब पूरे प्रतापपुर विकासखंड की पोषण आहार व्यवस्था की स्वतंत्र एवं वैज्ञानिक जांच की मांग तक पहुंच गया है।
मामले को लेकर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों एवं जागरूक नागरिकों ने मुख्यमंत्री, महिला एवं बाल विकास मंत्री, कलेक्टर तथा एसडीएम के नाम हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन सौंपकर स्थानीय स्तर पर हुई जांच पर असंतोष जताया है। जनपद सदस्य राजू सिंह आयाम के नेतृत्व में सरपंच गोरगी, सरपंच पकनी, सरपंच मानी, अनिता सहित कई जनपद क्षेत्र के बीडीसी एवं ग्रामीणों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। ज्ञापन में करमेन, सरिता, मीनू, नूतन, यशोदा, राजकुमार, राहुल, घूरन पैकरा, संजय कुमार, नधू राम, देवनाथ, झरी राम, राजेन्द्र सहित दो दर्जन से अधिक लोगों के हस्ताक्षर बताए गए हैं।
स्थानीय जांच से संतुष्ट नहीं ग्रामीण :-
शिकायतकर्ताओं के अनुसार कलेक्टर के निर्देश के बाद स्थानीय स्तर पर टीम मौके पर पहुंची तथा सामग्री के नमूने लिए जाने की जानकारी सामने आई, लेकिन ग्रामीण जांच की निष्पक्षता को लेकर संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि केवल मौके पर पहुंचकर बयान दर्ज करना और कुछ पैकेटों के नमूने लेना पर्याप्त नहीं है। रेडी-टू-ईट की वास्तविक गुणवत्ता और व्यवस्था की जांच के लिए उत्पादन केंद्र से लेकर आंगनबाड़ी केंद्र तक पूरी आपूर्ति श्रृंखला की जांच आवश्यक है।
ग्रामीणों का कहना है कि मामला केवल करसी-मकनपुर के कुछ पैकेटों तक सीमित नहीं है। यदि किसी एक स्थान पर गुणवत्ता को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है तो उसी उत्पादन एवं आपूर्ति व्यवस्था से जुड़े पूरे प्रतापपुर विकासखंड में हितग्राहियों को वितरित की जा रही सामग्री की गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए।
सभी आंगनबाड़ी केंद्रों से नमूने लेने की मांग :-
ज्ञापन में प्रतापपुर विकासखंड के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों से रेडी-टू-ईट के नमूने लिए जाने की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि नमूनों को विधिवत सीलबंद कर अधिकृत प्रयोगशाला में वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भेजा जाए तथा नमूना लेने से लेकर सील करने और प्रयोगशाला तक भेजने की प्रक्रिया में शिकायतकर्ताओं की मौजूदगी सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों के अनुसार इससे जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी और भविष्य में जांच रिपोर्ट पर किसी प्रकार का संदेह नहीं रहेगा।
उत्पादन केंद्रों के औचक निरीक्षण की मांग :-
शिकायतकर्ताओं ने उत्पादन केंद्रों का औचक भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है। इसके तहत कच्चे माल की खरीद, मशीनरी, श्रमिकों की उपलब्धता, उत्पादन क्षमता, स्टॉक, पैकिंग एवं वितरण व्यवस्था की जांच करने की मांग की गई है।
इसके साथ ही उत्पादन रजिस्टर, स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर तथा हितग्राही सूची का मौके पर मिलान कराने और दस्तावेजों में दर्ज उत्पादन तथा वास्तविक उत्पादन की मात्रा की जांच की मांग भी की गई है।
बिल-वाउचर और बैंक रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में :-
ज्ञापन में समूहों के चयन एवं पात्रता, कार्य आवंटन, खरीद प्रक्रिया, बिल-वाउचर, भुगतान अभिलेख, बैंक रिकॉर्ड, परिवहन व्यवस्था तथा गुणवत्ता परीक्षण से संबंधित दस्तावेजों की जांच की मांग की गई है।
इसके अलावा बाहर से तैयार सामग्री लाकर स्थानीय स्तर पर उसकी पैकिंग अथवा वितरण किए जाने संबंधी शिकायतों की भी जांच कराने की मांग की गई है।
ग्रामीणों ने जांच पूरी होने तक उत्पादन, स्टॉक, वितरण, भुगतान, बैंक, परिवहन तथा नमूना परीक्षण से संबंधित सभी अभिलेख सुरक्षित रखने के निर्देश जारी करने की मांग की है।
“गुणवत्ता सही है तो वैज्ञानिक रिपोर्ट सार्वजनिक हो” :-
ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल कार्रवाई को लेकर है। उनका कहना है कि शिकायत के बाद काफी समय बीत चुका है। मामला कई बार मीडिया में उठ चुका है और कलेक्टर के निर्देश पर जांच भी हो चुकी है, लेकिन अभी तक ठोस एवं निर्णायक कार्रवाई सामने नहीं आई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि रेडी-टू-ईट सामग्री गुणवत्तापूर्ण पाई गई है तो इसकी वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट सामने लाई जानी चाहिए। वहीं यदि गुणवत्ता में गड़बड़ी या किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
बिना जांच किसी को दोषी ठहराना उद्देश्य नहीं :-
शिकायतकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को बिना जांच दोषी ठहराना नहीं है। वे केवल स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं वैज्ञानिक जांच चाहते हैं। यदि जांच में सामग्री मानकविहीन पाई जाती है अथवा वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता प्रमाणित होती है, तो संबंधित समूह, उत्पादक, सप्लायर तथा जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी :-
ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि मामले को फिर लंबित रखा गया, स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच शुरू नहीं हुई और समयबद्ध कार्रवाई नहीं की गई तो ग्रामीण एवं आवेदक एसडीएम कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन सहित व्यापक जनआंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे।
अब इस मामले में प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। क्या पूरे प्रतापपुर विकासखंड की रेडी-टू-ईट आपूर्ति व्यवस्था की निष्पक्ष जांच होगी? क्या नमूनों की वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट सामने आएगी? क्या पुराने रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे? और यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी प्रमाणित होती है तो क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी—इन सवालों के जवाब का ग्रामीण इंतजार कर रहे हैं।
बच्चों, गर्भवती महिलाओं और माताओं के पोषण से जुड़े इस संवेदनशील मामले में ग्रामीण अब सिर्फ जांच नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच के साथ समयबद्ध कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
एसडीएम ने कही कड़ी जांच की बात :-
इस संबंध में एसडीएम ललिता भगत ने कहा कि संबंधित मामले में आवेदन प्राप्त हुआ है। आवेदन को जिले के अधिकारियों सहित संबंधित विभागीय अधिकारियों को भेजा जाएगा तथा मामले की कड़ी जांच एवं आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।