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डीएमएफ घोटाले की जांच -वित्तीय वर्ष 2024-25 में 40% रिश्वत लेने तक का लगा आरोप….

जिला पंचायत सामान्य सभा में घोटालों की बाढ़, स्ट्रीट लाईट से लेकर टैंकर और जीवाईएम खरीदी तक सवालों के घेरे में….

संचालक :-दीपक गुप्ता….✍️

CG Samachar 24.in

रायपुर /बेमेतरा :- जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक में इस बार विकास कार्यों से अधिक भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों पर चर्चा केंद्रित रही। बैठक के दौरान जनप्रतिनिधियों ने नगर पंचायतों और शिक्षा संस्थानों में हुई करोड़ों रुपये की खरीदी पर सवाल उठाते हुए कहा कि योजनाएं जनता के लिए नहीं, बल्कि कमीशनखोरी का माध्यम बन गई हैं।

सामान्य सभा में विशेष रूप से स्ट्रीट लाईट, पानी टैंकर, टैंकर क्रय और जीवाईएम सामग्री खरीदी से जुड़े मामलों पर तीखी बहस देखने को मिली। सदस्यों ने एक के बाद एक घोटालों का मुद्दा उठाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

स्ट्रीट लाईट घोटाला :- बैठक में बताया गया कि नगर पंचायत मारो, पड़पोड़ी और जनपद क्षेत्रों में स्ट्रीट लाईट के नाम पर भारी अनियमितताएं हुई हैं। आरोप है किघटिया गुणवत्ता की लाईट लगाई गई ! तय मानकों की अनदेखी की गई ! बाजार दर से कहीं अधिक कीमत पर खरीदी की गई !

सदस्यों ने सवाल उठाया कि जिन वार्डों में लाईट लगी ही नहीं, वहां भुगतान कैसे कर दिया गया।

नवागढ़ और साजा में टैंकर क्रय घोटाला :- नवागढ़ और साजा में टैंकर खरीदी को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए। सदस्यों ने कहा कि जरूरत से अधिक कीमत पर टैंकर खरीदे गए
खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रखी गई
टैंकरों की तकनीकी गुणवत्ता संदेह के घेरे में है

आरोप यह भी लगा कि कई टैंकर या तो उपयोग में नहीं हैं या फिर कागजों में ही चल रहे हैं। जबकि पूर्व में पन्द्रहवें वित्त की राशि से खरीदी की गई थी बौजुद उसके खरीदी की आवश्यकता क्यों पड़ी। ठेकेदार के चुनाव भी अपने खास को चुना गया।

स्वामी आत्मानंद स्कूल में जीवाईएम सामग्री क्रय पर सवाल…? :- सामान्य सभा में स्वामी आत्मानंद विद्यालय में जीवाईएम सामग्री खरीदी का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। आरोप है कि
जरूरत से ज्यादा कीमत पर जीवाईएम.सामग्री खरीदी गई ।
सामग्री की गुणवत्ता बेहद घटिया है ।
कई उपकरण उपयोग लायक नहीं हैं ।
सदस्यों ने कहा कि शिक्षा के नाम पर दिखावटी सुविधाओं में भारी भ्रष्टाचार किया गया।

नगर पंचायत परपोड़ी में एलईडी लाईट घोटाला :- नगर पंचायत परपोड़ी में एलईडी लाईट खरीदी और स्थापना को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए। कहा गया कि , कम गुणवत्ता की एलईडी लाईट लगाई गई
वारंटी और मेंटेनेंस की शर्तों का पालन नहीं हुआ
भुगतान पहले और काम बाद में किया गया ।

जनप्रतिनिधियों का आरोप – योजनाएं बनीं ‘कमाई की मशीन’.सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि चाहे स्ट्रीट लाईट हो, टैंकर हो या जीवाईएम सामग्री—हर योजना में एक ही पैटर्न दिखाई दे रहा है: महंगी खरीदी, घटिया सामान और कागजी काम।
यह स्थिति प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

नए कलेक्टर व जिला पंचायत सीईओ उक्त घोटाले से अनभिज्ञ :- सदस्यों ने इस जवाब को असंतोषजनक बताते हुए स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच की मांग रखी। सूत्र बताते हैं कि यह डीएमएफ राशि से खरीदी का मामला एडीएम रहते हुए एसडीएम पद पर काबिज प्रकाश भारद्वाज व पूर्व जिला पंचायत सीईओ टेकचंद अग्रवाल के कार्यकाल में घोटाले हुए हैं।

जांच की मांग तेज :- बैठक के अंत में यह स्पष्ट हो गया कि खरीदी से जुड़े मामलों पर जल्द ही जांच का दबाव बढ़ने वाला है। यदि आरोप सही पाए गए, तो आने वाले दिनों में कई अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।

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