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शहर के बेटी की पहल: परीक्षा से ठीक पहले पति की मौत के कारण नहीं दे पाई परीक्षा, अब गरीब बच्चों को अफसर बनाने उनके पढाई मे खर्च कर रहीं अपने वेतन का 60% राशि…

सीजीपीएससी की निशुल्क तैयारी कराने सैलरी का 60% हिस्सा ऑनलाइन क्लॉस में लगा रहीं, ताकि गरीब बच्चे बन सकें डिप्टी कलेक्टर व अफसर….

CG Samachar 24.in

संचालक :- दीपक गुप्ता…✍️

सूरजपुर :- सूरजपुर की बेटी संगीता सोनी गरीब बच्चों को डिप्टी कलेक्टर के साथ सरकारी अफसर बनाने के लिए अपने वेतन का कुल 60% हिस्सा निशुल्क शिक्षा देने में लगा रही हैं। कलेक्टोरेट में सहायक ग्रेड-2 के पद पर काम करने वाली संगीता काम पर जाने से पहले और काम से लौटने के बाद एक-एक विशेष क्लास लेती हैं, जिससे सीजीपीएससी के साथ व्यापम और दूसरे प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे बच्चों की मदद हो सकें। वहीं जो बच्चे जिला मुख्यालय नहीं आ पाते उनको शिक्षित करने ऑनलाइन क्लास के जरीए मोटिवेशन, कैरियर गाइडेंस के साथ संपूर्ण छत्तीसगढ़, जनजाति और संविधान जैसे कठिन विषयों की पढ़ाई करा रही हैं। संगीता के ऑनलाइन क्लास में रोजाना 600 से अधिक बच्चे जुड़ते हैं। बता दें संगीता खुद भी दो बार सीजीपीएससी का मेंस पास कर चुकी हैं, लेकिन विपरित परिस्थितियों और घर की जिम्मादारियों के साथ परीक्षा से ठीक पहले पति की असमय मृत्यु के कारण परीक्षा ठीक से नहीं दे पाई, डिप्टी कलेक्टर नहीं बनी तो अवसाद में चली गई। अब इस अवसाद से निकलने के लिए गरीब व जरुरतमंद बच्चों को डिप्टी कलेक्टर और दूसरा अफसर बनाने की उन्होंने ठानी है। संगीता का पढाने का आधुनिक तकनिक और सरल तरीके के कारण बच्चे कक्षा में इनके आने का इंतजार करते हैं।

हिंदी माध्यम के बच्चों को एनसीईआरटी की दे रही बेसिक जानकारी, रात दो बजे तक नोट्स कर रही तैयार :- बता दें कि संगीता भले ही डिप्टी कलेक्टर नहीं बन पाईं लेकिन अब दूसरे बच्चों को अफसर बनाने के लिए संगीता रात के 2:00 बजे तक ऑनलाइन क्लॉस के लिए कंटेंट तैयार करती है। जिससे बच्चों को आसान भाषा में संबंधित विषय समझ आए। इसके साथ ही एनसीईआरटी की भी किताब की बेसिक जानकारी संगीता बच्चों को सीखा रहीं हैं। हिंदी माध्यम के बच्चों को विशेष लाभ मिल रहा है। वहीं सूरजपुर में प्रयोगीत परीक्षा की तैयारी करने वाले बच्चों के लिए चलने वाले निशुल्क अरुणोदय क्लास में भी बच्चों को एक क्लास पढाती हैं।

जो बच्चे घर के बाहर पढाई के लिए नहीं जा पाते वे घर पर ही रहकर सबकुछ सीख पाए यहीं मेरा उद्देश्य :- संगीता बताती हैं कि आज भी सूरजपुर सहित सरगुजा संभाग में कई ऐसी लड़कियां हैं, जिनके सपने बड़े हैं लेकिन पैसे की कमी के कारण घर से बाहर नहीं निकल पाते हैं। ऐसे बच्चे उनकी ऑनलाइन क्लॉस एसएस ट्रिकी पर आकर वीडियो देखकर घर पर ही रहकर तैयारी कर सकते हैं। उनके वीडियो में वो हर चीज मिलेगा जो सीजीपीएसी की तैयारी के लिए जरुरी होता है। कई बार परिजन बच्चों को बाहर भी इस लिए नहीं भेजते हैं कि बाहर जाने के बाद रहने और खाने के साथ कोचिंग की फीस भी इतनी ज्यादा होती है कि परिजन खर्च नहीं उठा पाते। इसीलिए ऑनलाइन क्लॉस की व्यवस्था अपने खर्चे पर संगीता ने की है। जिससे बच्चों को भटकना न पडें।

सुपर-30 के तर्ज पर आने वाले समय में डिप्टी कलेक्टर बनाने का लक्ष्य :- राजस्व विभाग में काम करने वाली संगीता पर अपने खर्च पर बच्चों को बेहतर तरीके से शिक्षा देने के लिए डिजीटल क्लॉस भी तैयार कर रही है। जहां बच्चों को आसानी से सरल तरीके से पढाया जा सकें। इसके लिए उन्होंने तैयारी भी शुरु कर दी है। आने वाले समय में संगीता ने सुपर-30 के तर्ज पर होनहार बच्चों का चयन कर उन्हें पूरी सुविधा देकर डिप्टी कलेक्टर बनाने का लक्ष्य रखा है।

जो मैं नहीं बन सकीं अब मेरे गांव-शहर के बच्चे बनें, यही मेरी ख्वाईश :- संगीता सोनी बतातीं हैं कि मैं सीजीपीएससी की 2018 से ही घर पर रह कर तैयारी कर रही थी, सबकुछ ठीक चल रहा था, दो बार मेंस की भी परीक्षा पास की। लेकिन इंटरब्यू से ठीक पहले मां -पिता की तबियत अचानक खराब हो जाती थी। मां- पिता बुजुर्ग हैं मेरे साथ ही रहते हैं। 2024 की परीक्षा में सबकुछ तैयार था, लेकिन परीक्षा से ठीक पहले अचानक से मेरे पति डेथ (मौत) कर गए। ऐसा लगा मेरा एक हाथ कट गया। मैं डिप्रेशन में चली गई और परीक्षा नहीं दे पाई। परीक्षा देने का यह मेरे लिए अंतिम मौका था। महीनों तक मैं डिप्रेशन में ही रहीं। कुछ दिन बाद ऐसा लगा कि मेरी यह पढाई ब्यर्थ नहीं जानी चाहिए। तभी मैने ग्रामीण बच्चे जो अफसर बनना चाहते हैं, आगे जाना चाहते हैं और कई प्रकार के आभावों के कारण आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं, उनको पढाने की ठानी और डिप्टी कलेक्टर बनाने की मुहिम में जुट गई हूं। अब ड्यूटी से आने के बाद बच्चों को निशुल्क पढाती हूं। मेरा संकल्प हैं बच्चों को पढाई के लिए जो मदद होगीं, सब करुंगी। क्योकि जो मैं नहीं बन सकीं वो मेरे शहर और गांव के बच्चे बनें, यही मेरी ख्वाईश है।

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