जल संकट – 21 वर्षों से पानी के लिए जुझ रहे ग्रामीण , केवल योजना बनकर रह गया है जल जीवन मिशन….
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संचालक :-दीपक गुप्ता….✍️
सूरजपुर :- जिले के भैयाथान ब्लॉक मुख्यालय अंतर्गत ग्राम बड़सरा, दर्रीपारा, दनौली खुर्द, खड़गवां और केंवरा के ग्रामीण पिछले 21 साल से जल संकट की मार झेल रहे हैं। यहां की महिलाओं के हर दिन के चार घंटे सिर्फ पानी जुटाने में ही बीत जाते हैं। गांव में 560 फीट तक पानी नहीं हैं। 43 से अधिक सरकारी हैंडपंप सूख चुके हैं। खड़गवां से 1.5 किमी दूर एक सोलर पंप है, जो कि गांव के 4800 लोगों का सहारा है। गांव की अधिकांश महिलाएं सिर पर पानी ढोकर लाती हैं।

वहीं जिन लोगों के पास साधन है, वो कार और ऑटो में डिब्बों में पानी घर तक ला रहे हैं। इस साल तो तापमान बढ़ने से संकट अधिक है।
यह सिर्फ इन गांवों की नहीं, बल्कि क्षेत्र के करीब 10 पंचायत की समस्या है। इलाके के कुएं सूख चुके हैं। हालत यह है कि दनौली – बड़सरा जैसे गांव में लोग पानी की किल्लत के चलते सप्ताह में एक बार नहाते हैं। सक्षम लोग दूसरे गांव के बोरवेल, नदी – तालाब से 1200 रुपए प्रति टैंकर के हिसाब से पानी मंगाकर कुएं में डलवा रहे हैं। यह भी सिर्फ चार दिन ही चलता है। ग्राम पंचायत दनौली खुर्द में भी पानी नहीं हैं। पूरे गांव में 34 हैंडपंप हैं, जिसमें से 22 हैंडपंप पूरी तरह से सूख चुके हैं। वहीं बाकी में से सिर्फ आधा बाल्टी ही पानी निकलता है। यहां के लोग दो किमी दूर पैदल गांव केंवरा के सड़कपारा जाकर पानी लाते हैं। वहां भी जिस सोलर पंप से पानी मिलता है, वहां घंटों इंतजार करना पड़ता है। इसके बाद भी आधे घंटे में हैंडपंप से 20 लीटर ही पानी निकलता है। यह सोलर पंप भी अब सूखने की कगार पर है। इलाके के दर्रीपारा और खड़गवां का भी यही हाल है। दर्रीपारा में तो एक ही बोर का पानी पूरा गांव पीता है। इकलौता बोर भी सूख जाए, तो आफत आ जाएगी। पूरा गांव ड्राइजोन घोषित है। इसके बाद भी प्रशासनिक अमला न टैंकर से पानी पहुंचा रहा है और न ही जल जीवन मिशन यहां सफल है। यहां की 3500 आबादी पानी की समस्या से जूझ रही है। खड़गवां की 1800 आबादी को सिर्फ एक कुएं का ही सहारा है। इलाके के लोगों ने मंत्री-विधायक से 40 से अधिक बार अलग-अलग जगह पर डीप बोर करने की मांग की है, लेकिन अब तक राहत नहीं मिल पाई है।

कभी-कभी लगता है गांव छोड़ चले जाएं :- बड़सरा आम्माखोखा मोहल्ले के राम कुमार सिंह ने कहा हर गर्मी में पानी की समस्या होती है। कभी-कभी ऐसा लगता है कि गांव छोड़ ही चले जाएं। कई बार मवेशी पानी बिना ही प्यासे रह जाते हैं। चार साल पहले बड़ी टंकी बनी, तो लगा था अब पानी आएगा। लेकिन अब तक हमें निराशा ही मिली ।
बड़सरा गांव के ग्रामीण अपने साधन से 1.4 किमी दूर झेंझरीपारा पानी लेने पहुंचते हैं ।
बड़सरा और दनौली गांव के लोगों की जानिए परेशानी :- भैयाथान ब्लॉक अंतर्गत बड़सरा गांव के रहने वाले प्रेम सुंदर यादव ने बताया कि हमारे मोहल्ले में 21 साल से बोरवेल व हैंडपंप में कभी पानी नहीं मिला। दशकों से डीप बोरवेल की मांग मोहल्लेवासी करते रहे, लेकिन 300 फीट ही खनन कर छोड़ दिया जाता है, जिससे ना पानी मिलता है और ना समस्या दूर होती है। एक किलोमीटर दूर खेतवाही ढ़ोड़ी से पानी लाते हैं।
गर्मी में दूसरी पंचायत जाने को होते हैं मजबूर :- दनौली गांव के गोविंदा के मुताबिक उनकी पंचायत ड्राई जोन वाला बेल्ट है, जहां दो दर्जन से अधिक हैंडपंप बोरवेल खनन के बावजूद भी पानी नहीं निकला है। कुछ जगहों पर पानी निकला तो वो भी नाम-मात्र का। पीने के पानी के लिए लंबी कतार लगती है। तीन से चार घंटा तो पानी लाने में ही समय लग जाता है। गोविंदा ने बताया कि वे गर्मी के दिन में दनौली छोड़कर दूसरी पंचायत बसकर चले जाते हैं।
पत्रकारों के सवालों पर पीएचई विभाग के ईई एम के . मिश्रा ने कहा कि – कितने गांव ड्राइजोन है, इसके काम करा रहे हैं। इस बारे में तो जानकारी नहीं है।
उन्होंने बड़े ही तल्ख अंदाज में आगे कहा की अब मैं तो घर-घर पानी नहीं पहुंचा सकता हूँ न ! प्लानिंग कर रहे हैं !
साथ ही उन्होंने बताया कि सरकारी योजना जल जीवन मिशन (जेजेएम) का ही अभी काम चल रहा है। जल्द ही पानी मिलने लगेगा ।
