ढोढ़ही और तालाब का गंदा पानी पीने को मजबूर ग्रामीण, मंडराया महामारी का खतरा….
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संचालक :- दीपक गुप्ता….✍️
सूरजपुर :- जिले के भैयाथान विकासखंड अंतर्गत ग्राम गोविंदगढ़ और बैजनाथपुर की बदहाली की सुध लेने वाला कोई नहीं है शासन – प्रशासन द्वारा उचित पहल नही होने पर ग्रामीणों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है ।
एक तरफ जहां हर घर जल और विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जिले के ग्रामीण आज भी आदिम युग की तरह दूषित पानी पीकर अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं।
पुरा मामला जिले के भैयाथान विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गोबिंदगढ़ और बैजनाथपुर का है, जहाँ के दो गांवों से प्रशासनिक संवेदनहीनता की झकझोर देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं ।
जहां गोविंदगढ़ के आदिवासी ग्रामीण ढोढ़ही (झरिया) का गंदा पानी पी रहे हैं ।

वहीं बैजनाथपुर के आमापानी के लोग तालाब के मटमैले और दूषित पानी से अपनी जिंदगी चला रहे हैं।
जल संकट और प्रशासनिक उपेक्षा की यह पराकाष्ठा है कि भीषण गर्मी के इस मौसम में आदिवासियों के पास दूषित जल स्रोतों के अलावा दूसरा कोई विकल्प ही नहीं बचा है।

कभी भी पनप सकती है महामारी :- स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, जिस पानी का उपयोग ग्रामीण कर रहे हैं, वह सीधे तौर पर जानलेवा बीमारियों को आमंत्रण दे रहा है।
इस दूषित पानी के सेवन से ग्रामीणों में हैजा , कॉलरा , टायफाइड, पीलिया , हेपेटाइटिस डायरिया (उल्टी-दस्त) और पेचिश जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियों का खतरा चौबीसों घंटे मंडरा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे हर दिन डर-डर कर यह पानी पीते हैं, क्योंकि उनके पास बच्चों और बुजुर्गों की प्यास बुझाने का कोई और साधन नहीं है।
पानी दो या आंदोलन सहो ग्रामीणों का फूटा गुस्सा :- ग्रामीणों के सब्र का बांध अब टूट चुका है। क्षेत्र के आदिवासी ग्रामीणों ने शासन और जिला प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उन्हें शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं कराया गया, तो वे सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने साफ कहा है कि इस लापरवाही के खिलाफ उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
यह स्थिति तब है जब जिले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग और भारी-भरकम प्रशासनिक अमला मौजूद है ।
क्या प्रशासन किसी बड़ी महामारी या किसी मासूम की जान जाने का इंतजार कर रहा है
ग्रामीणों का कहना है कि हमारी मांग है जिला प्रशासन इस मामले को तत्काल संज्ञान में ले। कागजी दावों से जमीनी हकीकत को देखते हुए गोविंदगढ़ और बैजनाथपुर के प्रभावित इलाकों में तत्काल टैंकरों या अन्य माध्यमों से शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की जाए, ताकि इन ग्रामीणों को मौत के मुंह में धकेलने से बचाया जा सके।


