14 वर्षीय आदिवासी नाबालिग की संदिग्ध मौत से मचा हड़कंप…..

करौंधा बस्ती में मौत को लेकर उठे गंभीर सवाल, निष्पक्ष एवं मजिस्ट्रियल जांच की मांग….

संचालक :- दीपक गुप्ता…✍️

CG Samachar24.in

सूरजपुर। जिले के जरही-भटगांव थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम करौंधा बस्ती में करीब 14 वर्षीय आदिवासी नाबालिग बच्ची की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। मृतका की पहचान सुमन चेरवा के रूप में बताई जा रही है, जो मूलतः थाना चांदो, जिला बलरामपुर-रामानुजगंज क्षेत्र की निवासी बताई जा रही है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार नाबालिग बच्ची को कथित तौर पर काम करने के लिए करौंधा बस्ती निवासी श्रवण जायसवाल के यहां बुलाया गया था। इसी दौरान उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय ग्रामीणों एवं क्षेत्रवासियों में आक्रोश है और मामले की निष्पक्ष तथा उच्चस्तरीय जांच की मांग उठ रही है।

दूसरे जिले में नाबालिग को काम के लिए क्यों लाया गया? :-

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि महज 14 वर्ष की नाबालिग आदिवासी बच्ची को उसके मूल निवास क्षेत्र से दूसरे जिले में काम करने के लिए किन परिस्थितियों में लाया गया? उसे किसके माध्यम से बुलाया गया और इस संबंध में उसके परिवार को क्या जानकारी थी—इन सभी पहलुओं की जांच आवश्यक है।

इसके साथ ही बच्ची की मौत किन परिस्थितियों में हुई, घटना के समय वह किसके साथ थी और मौत से पहले उसके साथ क्या हुआ, यह भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

गंभीर आरोप, लेकिन पुष्टि जांच के बाद :-

घटना के बाद कुछ लोगों द्वारा बच्ची के साथ गलत कृत्य किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। वास्तविक स्थिति पुलिस जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल परीक्षण और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।

क्षेत्र में इस तरह की किसी पूर्व घटना की चर्चा भी सामने आ रही है, लेकिन इसकी भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में संबंधित एजेंसियों के लिए वर्तमान घटना से जुड़े प्रत्येक पहलू की तथ्यात्मक जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

मजिस्ट्रियल जांच की मांग :-

नाबालिग बच्ची की संदिग्ध मौत को लेकर क्षेत्रवासियों एवं सामाजिक संगठनों की ओर से मजिस्ट्रियल जांच की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से होनी चाहिए।

क्षेत्रवासियों की प्रमुख मांगों में —

– नाबालिग बच्ची की मौत की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच।
– पोस्टमार्टम एवं मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मौत के वास्तविक कारणों को स्पष्ट किया जाए।
– घटनास्थल एवं संबंधित व्यक्तियों से जुड़े साक्ष्यों की वैज्ञानिक तरीके से जांच की जाए।
– यदि किसी प्रकार का अपराध सामने आता है तो दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
– बच्ची को काम के लिए बुलाए जाने तथा उससे जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जाए।
– पूरे मामले में मजिस्ट्रियल जांच कराई जाए।

पुलिस जांच पर टिकी निगाहें :-

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन के सामने भी कई महत्वपूर्ण सवाल हैं। जांच में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष गवाहों के बयान, बच्ची के करौंधा बस्ती पहुंचने की परिस्थितियों तथा उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों की जांच अहम मानी जा रही है।

मामले की गंभीरता और मजिस्ट्रियल जांच की मांग को लेकर पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल ने कहा कि मामले में तत्काल कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया है और जांच के माध्यम से जल्द ही सच्चाई सामने लाई जाएगी।

एसपी के इस बयान के बाद अब क्षेत्रवासियों की निगाहें पुलिस जांच की कार्रवाई और उसके निष्कर्ष पर टिकी हुई हैं।

कई सवालों के जवाब जांच से होंगे स्पष्ट :-

इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—

क्या बच्ची की मौत प्राकृतिक अथवा दुर्घटनावश हुई या इसके पीछे कोई आपराधिक कारण है?

क्या मेडिकल और फॉरेंसिक जांच से मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा होगा?

क्षेत्रवासियों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों में कितनी सच्चाई है?

नाबालिग बच्ची को दूसरे जिले में काम के लिए किन परिस्थितियों में लाया गया था?

इन सभी सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।

फिलहाल, सुमन चेरवा की संदिग्ध मौत ने सूरजपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में गंभीर चिंता पैदा कर दी है। मामला केवल एक नाबालिग बच्ची की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि नाबालिगों की सुरक्षा और उन्हें काम के लिए दूसरे स्थानों पर ले जाने से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल भी सामने ला रहा है।

अब आवश्यकता है कि मामले की जांच बिना किसी दबाव के पूरी निष्पक्षता और गंभीरता से की जाए। यदि जांच में किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

सुमन चेरवा की मौत आखिर कैसे हुई?
यह सवाल अब उसके परिवार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र के सामने है।

जांच की रिपोर्ट ही स्पष्ट करेगी कि यह एक असामान्य मौत थी या इसके पीछे कोई आपराधिक घटनाक्रम था। फिलहाल सभी की निगाहें पुलिस जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सामने आने वाले वैज्ञानिक साक्ष्यों पर टिकी हुई हैं।

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