कागजों में 80% काम पूरा, लेकिन जमीनी हकीकत में ग्रामीणों को नहीं मिली एक बूंद पानी; मुख्य पाइपलाइन और वाटर स्टोरेज का काम अब तक अधूरा….
CG Samachar24.in
संचालक :- दीपक गुप्ता….✍️
सूरजपुर / भैयाथान :- केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना विकासखंड भैयाथान में सवालों के घेरे में है। करोड़ों रुपये खर्च कर 52 ग्राम पंचायतों में पानी की टंकियां, स्टैंड पोस्ट और पाइपलाइन तो बिछा दी गई, लेकिन दो वर्ष बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों को नल से पानी की एक बूंद तक नसीब नहीं हुई है। योजना का अधूरा क्रियान्वयन अब सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर उजागर कर रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिन स्टैंड पोस्ट से घर-घर पानी पहुंचना था, वे आज बेकार पड़े हैं। कहीं इनका उपयोग अंडे-पकौड़े की दुकान चलाने में हो रहा है, कहीं कपड़े सुखाने के लिए और कई स्थानों पर पाइप झाड़ियों के बीच धूल फांक रहे हैं। कई गांवों में स्टैंड पोस्ट तक उखड़ चुके हैं।
कागजों में प्रगति, जमीन पर प्यासे ग्रामीण :-
जल जीवन मिशन की वेबसाइट पर योजना की प्रगति 80 प्रतिशत दर्शाई गई है जबकि वास्विकता उसके बिल्कुल विपरीत है । अधिंकाश गांवों मे पानी की आपूर्ति शुरु ही नही हुई ।
मुख्य पाइपलाइन ही नहीं बिछी :-
योजना के तहत झिलमिली स्थित रेणुका नदी से 52 ग्राम पंचायतों तक पानी पहुंचाया जाना था। गांवों में पाइपलाइन और स्टैंड पोस्ट तो बना दिए गए, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण मुख्य पाइपलाइन का कार्य आज तक शुरू नहीं हो पाया। परिणामस्वरूप पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर बेकार साबित हो रहा है।
बिना वाटर स्टोरेज के शुरू कर दिया निर्माण :-
जानकारी के अनुसार, रेणुका नदी पर वाटर स्टोरेज निर्माण का टेंडर 13 मई 2025 को जारी किया गया, जबकि गांवों में स्टैंड पोस्ट और पाइपलाइन का निर्माण इससे काफी पहले शुरू कर दिया गया था। ऐसे में सवाल उठता है कि जब पानी संग्रहण की व्यवस्था ही नहीं थी तो करोड़ों रुपये खर्च कर निर्माण कार्य क्यों कराया गया? यह पूरे मामले में योजना निर्माण और क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
हाइड्रो पावर प्लांट बना बड़ी बाधा :-
बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर वाटर स्टोरेज प्रस्तावित था, वहां पिछले लगभग पांच वर्षों से हाइड्रो पावर प्लांट संचालित है। प्लांट द्वारा पानी के उपयोग और निकासी के कारण वहां स्थायी जलभराव नहीं हो पाता। बाद में विभाग ने प्रस्तावित टेंडर को भी निरस्त कर दिया, जिससे योजना और अधिक अधर में लटक गई।
क्या बोले पीएचई एसडीओ :-
इस संबंध में पीएचई विभाग के एसडीओ डी.के. जैन ने कहा कि योजना की प्लानिंग शासन स्तर पर होती है और विभाग केवल उसका क्रियान्वयन करता है। उन्होंने बताया कि रेणुका नदी पर स्टोरेज निर्माण का कार्य शुरू होने वाला था, लेकिन शासन स्तर पर टेंडर निरस्त कर दिया गया। मार्च तक नई टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्य शुरू होने की उम्मीद है। उनका यह भी कहना है कि जिन ग्रामों में कार्य 100 प्रतिशत पूर्ण है, वहीं नल से जल प्रदाय किया जा रहा है।
बड़ा सवाल…? :-
करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि दो वर्षों बाद भी ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, तो जिम्मेदारी किसकी है? क्या बिना पूरी योजना और आधारभूत व्यवस्था के निर्माण कार्य शुरू करना केवल सरकारी धन की बर्बादी और लापरवाही का उदाहरण नहीं है? अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही तय होगी और वर्षों से अधूरी पड़ी योजना को जल्द पूरा किया जाएगा।