ईश्वर की सच्ची भक्ति में धैर्य, विश्वास और समर्पण अत्यंत आवश्यक है – कथावाचक पं. रविन्द्र दुबे….
श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन भक्त प्रहलाद प्रसंग का वर्णन , चौथे दिन बाल कृष्ण के लीलाओं से श्रोता हुऐ मंत्रमुग्ध…
CG Samachar 24.in
संचालक :- दीपक गुप्ता…..✍️
सूरजपुर :- जिले के भैयाथान विकासखंड अंतर्गत ग्राम बड़सरा में साहू समाज द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव के तीसरे और चौथे दिन में भक्ति, ब्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा के चरम पर पहुंच गया है। कथा स्थल पर प्रतिदिन श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है कि यह आयोजन क्षेत्र में आस्था का केंद्र बन चुका है।
तीसरे दिन प्रहलाद प्रसंग का श्रोताओं ने किया रसपान :- महोत्सव के तीसरे दिन कथावाचक पंडित रविन्द्र दुबे ने अपने ओजस्वी और भावपूर्ण प्रवचनों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए भक्त प्रहलाद के प्रसंग को विस्तार से प्रस्तुत किया। कथा वाचक पं. दुबे ने बताया कि प्रहलाद ने विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान विष्णु की भक्ति का मार्ग नहीं छोड़ा। उनके पिता हिरण्यकश्यप ने उन्हें अनेक कष्ट दिए, लेकिन प्रहलाद का विश्वास अडिग रहा। अंततः भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर अपने भक्त की रक्षा की और अधर्म का अंत किया। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने संदेश दिया कि सच्ची भक्ति में धैर्य, विश्वास और समर्पण अत्यंत आवश्यक है। कथा के दौरान नरसिंह भगवान की जय और हरि
बोल के जयघोष से पूरा पंडाल गूंज उठा। श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा श्रवण करते रहे और कई भक्त भक्ति में लीन होकर झूमते नजर आए।

चौथे दिन भगवान श्री कृष्ण के लीलाओं का वर्णन :- चौथे दिन कथा में भगवान श्रीकृष्ण की विभिन लीलाओं का विस्तृत वर्णन किया गया। कथावाचक ने बताया कि श्रीकृष्ण का जीवन केवल चमत्कारों का नहीं, बल्कि नीति, धर्म और कर्तव्य का भी संदेश देता है। उन्होंने गोकुल और वृंदावन की बाल लीलाओं, माखन चोरी, कालिया नाग दमन और गोवर्धन पूजा जैसे प्रसंगों के माध्यम से जीवन के गूढ़ रहस्यों को सरल भाषा में समझाया।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्धन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली आध्यात्मिक शिक्षा है। यह हमें सिखाती है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर पर विश्वास बनाए रखना चाहिए और सदाचार के मार्ग पर चलना चाहिए।
वातावरण रहा भक्तिमय भजन , कीर्तन का विशेष आयोजन :- महोत्सव के तीसरे और चौथे दिन कथा स्थल पर भजन-कीर्तन का विशेष आयोजन भी हुआ, जिसमें स्थानीय भजन मंडलियों ने मधुर भजनों की प्रस्तुति दी। ढोलक, मंजीरा और हारमोनियम की धुनों पर गूंजते भजनों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। जय श्री कृष्ण और हरि बोल के जयकारों से पंडाल लगातार गूंजता रहा। श्रद्धालु न केवल कथा का श्रवण कर रहे हैं, बल्कि भक्ति में डूबकर आध्यात्मिक शांति का अनुभव भी कर रहे हैं। आयोजन स्थल पर महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की बड़ी भागीदारी देखने को मिल रही है।

सफल आयोजन के लिये निभाई जा रही सामूहिक भागीदारी :- इस महोत्सव को सफल बनाने में साहू समाज के साथ-साथ पूरे गांव का सराहनीय सहयोग मिल रहा है। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए बैठने, पेयजल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने में सुनील साहू, मनोज साहू, मितेश साहू, राम साहू, ओम प्रकाश साहू, अरविंद साहू, वीरेंद्र साहू, शोभा साहू, गोविंद साहू सहित समाज के कई गणमान्य लोग सक्रिय रूप से अपना योगदान दे रहे हैं।
बह रही भक्ति की बयार श्रीमद्भागवत कथा स्थल बना आस्था का केन्द्र :- महोत्सव के तीसरे
और चौथे दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ और उनके उत्साह को देखकर यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में यह आयोजन और भी भव्य रूप लेगा। ग्राम बड़सरा इन दिनों भक्ति, बद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम बन गया है, जहां हर ओर भक्ति की गूंज सुनाई दे रही है। यह महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत कर रहा है, बल्कि समाज में एकता, समरसता और सांस्कृतिक चेतना का भी संदेश दे रहा है।
