एसईसीएल बिश्नामपुर के बंद पड़े खदान मे मिली लाश , सुरक्षा पर उठे सवाल….??
CG Samachar 24.in
संचालक :-दीपक गुप्ता…✍️
सूरजपुर :- जिले के बिश्रामपुर क्षेत्र की बंद खदान स्थित 5-6 नंबर पोखरी में पिछले दो दिनों से एक अज्ञात शव तैर रहा है, लेकिन हमारा हाईटेक,, प्रशासन उसे पानी से बाहर निकालने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है।
सूचना मिलते ही पुलिस, डीडीआरएफ और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर भारी-भरकम अमले का प्रदर्शन तो किया, लेकिन दो दिनों की लगातार मशक्कत के बाद भी नतीजा शून्य, रहा। यह घटना सिर्फ एक रेस्क्यू ऑपरेशन की विफलता नहीं है, बल्कि जिले की आपदा प्रबंधन व्यवस्था के दावों का पोल खोलने वाली हकीकत है।
गोताखोरों से मिली जानकारी के मुताबिक, शुरुआत में शव पानी की ऊपरी सतह के बिल्कुल करीब था और उसे आसानी से निकाला जा सकता था। लेकिन रेस्क्यू टीम की अदूरदर्शिता और अनुभवहीनता के कारण, निकालने के प्रयास के दौरान शव और अधिक गहराई में चला गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इसके बाद मौके पर ऐसे कोई आधुनिक उपकरण या संसाधन मौजूद नहीं थे, जिससे शव को दोबारा ढूंढा या सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
इधर स्थानीय तंत्र की बेबसी का आलम यह रहा कि प्रशासन को आनन-फानन में सरगुजा से अतिरिक्त रेस्क्यू टीम बुलानी पड़ी। लेकिन संसाधनों की कमी और ठोस रणनीति के अभाव में वह टीम भी अब तक बेनतीजा ही साबित हुई है।

अब ऐसे में बड़े सवाल हैं कि जब लाश नहीं निकल रही, तो जिंदगियां कैसे बचेंगी ….? :- बिश्रामपुर की इस घटना ने प्रशासनिक तैयारियों, जवाबदेही और दावों पर कई गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं,, कागजी आपदा प्रबंधन, हर साल आपदा प्रबंधन और आधुनिक उपकरणों के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, तो फिर जमीनी हकीकत में पूरा तंत्र एक शव के सामने असहाय क्यों नजर आ रहा है

सुरक्षा पर गहराता संकट :- जब प्रशासन दो दिनों में एक शांत पोखरी से शव तक नहीं निकाल पा रहा, तो अगर कल को कोई बड़ा जल हादसा या बाढ़ जैसी आपदा आ जाए, तो जनता की जान कैसे बचाई जाएगी
आखिर किसकी जबाबदेही :- यह घटना चीख-चीखकर कह रही है कि सिस्टम सिर्फ कागजों पर दौड़ रहा है। बिश्रामपुर की पोखरी में सिर्फ एक अज्ञात शव नहीं डूबा है, बल्कि स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन की साख भी पानी में डूब चुकी है। जनता अब केवल खोखले दावों से संतुष्ट नहीं होने वाली उसे धरातल पर जवाबदेही और गतिविधि चाहिए।
