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भालू के हमले से महिला की मौत लोगों का वन विभाग पर फुटा गुस्सा….

CG Samachar 24.in

संचालक :- दीपक गुप्ता….✍️

सूरजपुर :- जिले में वन्यजीव और इंसानी संघर्ष की एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। तेंदूपत्ता तोड़ने गई एक 32 वर्षीय महिला फुलमती सिंह धुर्वे की भालू के हमले में दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना आज सुबह करीब 7:00 से 8:00 बजे के बीच ओड़गी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत चिकनी, (लांजित) क्षेत्र में हुई। इस हादसे ने न केवल फुलमती के परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया, बल्कि इलाके के ग्रामीणों में वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गुस्सा और आक्रोश भी भड़क उठा है। मिली जानकारी के अनुसार, फुलमती सिंह धुर्वे पति कैलाश सिंह धुर्वे सुबह जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ने गई थी। इसी दौरान अचानक एक भालू ने उन पर हमला कर दिया। भालू ने फुलमती को इतनी बेरहमी से काटा कि वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। हमले की तीव्रता इतनी थी कि फुलमती ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक फुलमती की जान जा चुकी थी। बहरहाल यह घटना एक बार फिर वन्यजीव और मानव के बीच बढ़ते संघर्ष की गंभीरता को उजागर करती है। सवाल यह है कि आखिर कब तक निर्दोष ग्रामीण अपनी जान गंवाते रहेंगे…? क्या वन विभाग और प्रशासन इस दिशा में कोई ठोस नीति लागू करेगा..?

इस दुखद घटना के बाद ग्राम पंचायत चिकनी और आसपास के इलाकों में ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है लोगों का कहना है कि वन विभाग की तमाम दावों और मुस्तैदी के बावजूद जंगल क्षेत्रों में वन्यजीवों के हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन विभाग द्वारा न तो जंगल में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और न ही ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं और फुलमती के परिवार को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।

जिले में भालू और अन्य वन्यजीवों के हमले कोई नई बात नहीं हैं। जंगल से सटे गांवों में रहने वाले लोग रोजी-रोटी के लिए तेंदूपत्ता तोड़ने और अन्य वन उत्पाद इकट्ठा करने जंगल में जाते हैं, जहां उनकी जिंदगी लगातार खतरे में रहती है। स्थानीय जानकारों का कहना है कि जंगल क्षेत्रों में मानव अतिक्रमण और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में कमी इस तरह की घटनाओं का प्रमुख कारण है। हालांकि, वन विभाग ने अभी तक इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

फुलमती की असमय मौत से उनके परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके पति कैलाश सिंह धुर्वे और अन्य परिजन सदमे में हैं। फुलमती परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थीं। उनकी मौत के बाद परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि फुलमती के परिवार को जल्द से जल्द आर्थिक सहायता और अन्य जरूरी मदद प्रदान की जाए।

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