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श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन उमड़ा आस्था का जन सैलाब निरंतर हो रहा भक्ति प्रवचन और सांस्कृतिक आयोजन….

CG Samachar 24.in

संचालक :- दीपक गुप्ता…..✍️

सूरजपुर :- जिले के भैयाथान विकासखंड अंतर्गत ग्राम बड़सरा इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा के अद्भुत संगम का केंद्र बना हुआ है। साहू समाज के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सब अब अपने तीसरे दिन में प्रवेश कर चुका है और बीते तीन दिनों से यहां भक्ति की ऐसी बयार बह रही है, जिसमें पूरा गांव डूबा हुआ नजर आ रहा है। श्रद्धालुओं का उत्साह, आयोजकों की भव्य व्यवस्था और कथा प्रवचनों की दिव्यता ने इस आयोजन की क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक केंद्र बना दिया है।

भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ था शुभारंभ, आस्था से सराबोर हुआ गांव :- इस सात दिवसीय धार्मिक आयोजन की शुरुआत भव्य कलश यात्रा के साथ हुई थी, जिसने पहले ही दिन पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। बड़सरा के साहू पारा से निकली इस कलश यात्रा में गांव की सैकड़ों महिलाएं, युवतियाँ और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। सिर पर सजे कलश, हाथों में नारियल और कलश के ऊपर रखे आम के पत्तों के साथ महिलाएं जब कतारबद्ध होकर चलीं, तो दृश्य अत्यंत आकर्षक और श्रद्धा से परिपूर्ण हो उठा।

भजन-कीर्तन और डीजे की मधुर धुनों के बीच यह यात्रा पूरे गांव का भ्रमण करती हुई राम मंदिर और शिव मंदिर स्थित तालाब तक पहुंची, जहां विधिवत पूजा-अर्चना कर जल भरा गया। पंडितों के वैदिक मंत्रोच्चार और श्रद्धालुओं के जय घोषों के बीच यह पल अत्यंत पावन बन गया। इसके बाद जल से भरे कलश लेकर श्रद्धालु कथा स्थल पहुंचे, जहां विधिपूर्वक श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ।

तीन दिनों से गूंज रहा कथा श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ रही भीड़ :- पहले दिन से ही कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, जो तीसरे दिन और भी बढ़ गई। महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे हर वर्ग के लोग कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। आकर्षक पंडाल, रंग-बिरंगी सजावट, फूलों की महक और धार्मिक प्रतीकों से सुसज्जित मंच ने पूरे बातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया है।

कथावाचक ने अपने प्रवचनों में श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का अत्यंत प्रभावी और सरल भाषा में वर्णन किया। उन्होंने बताया कि यह केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला दिल्य मार्गदर्शक है। कथा के माध्यम से उन्होंने धर्म, भक्ति, सदाचार, कर्म और मानवता के महत्व को विस्तार से समझाया।

प्रवचनों में जीवन का सार, श्रद्धालु हो रहे भाव-विभोर :- तीन दिनों से चल रही कथा में कथावाचक ने सृष्टि की उत्पत्ति, भगवान श्रीकृष्ण के बाल लीलाओं, भक्तों के प्रति उनकी करुणा और भक्ति के महत्व को विस्तार से बताया। उनके ओजस्वी और भावपूर्ण प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया है।

कथावाचक रविन्द्र दुबे ने कहा कि भागवत कथा का श्रवण केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि का माध्यम है। जब व्यक्ति भक्ति के मार्ग पर चलता है, तो उसके जीवन की सभी समस्याओं का समाधान स्वतः मिलने लगता है। उनके इन विचारों ने उपस्थित श्रद्धालुओं के मन में गहरी छाप छोड़ी।

कथा के दौरान कई अद्धालु भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए, तो कई ध्यानमग्न होकर कथा के प्रत्येक शब्द को आत्मसात करते दिखे। समय-समय

पर जय श्री कृष्ण और हरि बोल के जयघोष से पूरा पंडाल गूंज उठता है, जिससे माहौल और भी दिव्य हो जाता है।

भजन-कीर्तन से गूंजता वातावरण, सांस्कृतिक रंग मे रंगे भी श्रद्धालू :- श्रीमद्भागवत कथा केवल कथा ही नहीं, बल्कि भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी इस आयोजन को जीवंत बना दिया है। स्थानीय भजन मंडलियों द्वारा प्रस्तुत मधुर भजनों ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में डुबो दिया है। ढ़ोलक, मंजीरा और हारमोनियम की धुनों पर गाए जा रहे भजनों ने पूरे वाताबरण की संगीतमय और आध्यात्मिक बना दिया। तीन दिनों के दौरान शाम के समय भजन संध्या का विशेष आयोजन किया जा रहा है, जिसमें क्षेत्र के कलाकार अपनी प्रस्तुतियां दे रहे हैं। इसके साथ ही हवन-पूजन और प्रसाद वितरण जैसे कार्यक्रम भी नियमित रूप से आयोजित हो रहे हैं।

सामूहिक सहयोग बनी समाज मे एकता की मिशाल :- इस पूरे आयोजन की सबसे खास बात यह है कि इसे साहू समाज द्वारा सामूहिक सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। गांव के हर वर्ग युवा, बुजुर्ग,

महिलाएं-सभी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। आयोजन समिति के सदस्य दिन-रात व्यवस्था में जुटे हुए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। समिति के सदस्यों ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन करना नहीं, बल्कि समाज में एकता, भाईचारा और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन लोगों को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने का काम करते हैं।

आने वाले दिनों में उत्साह मे और होगी बृद्धि :- आयोजन समिति के अनुसार, आगामी दिनों में कथा और भी रोचक और ज्ञानवर्धक होती जाएगी। संत-महात्माओं के विशेष प्रवचन, भव्य भजन संध्या, हवन-पूजन और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जा रहा है। ग्राम बड़सरा में चल रहा यह श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव न केवल आस्था का केंद्र बना हुआ है, बल्कि पह सामाजिक समरसत्ता और सांस्कृतिक चेतना का भी प्रतीक बन गया है। तीन दिनों में जिस तरह से श्रद्धालुओं का उत्साह देखने को मिला है, उससे यह साफ है कि आने बाले दिनों में यह आयोजन और भी भब्य रूप लेगा। बड़मरा इन दिनों एक संदेश दे रहा है-भक्ति ही जीवन की सच्ची शक्ति है, और इसी संदेश के साथ पूरा गांव आध्यात्मिक ऊर्जा में आलोकित ही उठा है।

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