पेट्रोल से जिंदा जली 17 वर्षीया मोनिका सिंह आखिरकार हार गई जिंदगी की जंग इलाज के दौरान तोड़ा दम….

बेटी पढ़ाओ , बेटी बचाओं के सारे दावें फेल इधर जांच में जुटी पुलिस….

CG Samachar 24.in

संचालक :- दीपक गुप्ता….✍️

सूरजपुर :- जिले के बिश्रामपुर क्षेत्र से मानवता को शर्मसार करने वाली एक खबर सामने आई है। पेट्रोल छिड़ककर जिंदा जलाई गई 17 वर्षीय मोनिका सिंह ने आखिरकार रायपुर के अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
95 प्रतिशत तक जल चुकी मोनिका ने मौत से लंबी जंग लड़ी, लेकिन अंततः वह जिंदगी की बाजी हार गई।

इस खबर के फैलते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है और लोगों में आरोपी के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है।

दरिंदगी की शिकार हुई होनहार’ छात्रा :- सूत्रों के मुताबिक, इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वाला आरोपी भूपेंद्र सिंह बताया जा रहा है। आरोप है कि उसने मोनिका पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी थी।

मोबाइल के किस्त को लेकर युवक से हुआ था विवाद :- प्रारंभिक जानकारी में मोबाइल को लेकर रामनगर नीमपारा निवासी भूपेंद्र सिंह 21 वर्ष से छात्रा का विवाद सामने आया है। युवक के अनुसार उसने छात्रा को लोन पर मोबाइल दिलाया था, जिसकी किस्त को लेकर विवाद हुआ था ।

वहीं युवक का कहना है कि छात्रा ने किराना दुकान से पेट्रोल खरीदा, इस दौरान वह उसके हाथ से पेट्रोल छीनकर अपनी बाइक में डाल लिया और बाद में उसे आरटीआई कॉलोनी के पास छोड़ दिया गया। इसके बाद छात्रा कुछ दूरी पर झुलसी हालत में मिली।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि छात्रा ने खुद आग लगाई या किसी अन्य ने घटना को अंजाम दिया। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और दोनों पक्षों के परिजनों से भी पूछताछ के लिए थाना बुलाए जाने की खबर है।
मृतिका मोनिका न केवल पढ़ाई में अव्वल थी, बल्कि अपने माता-पिता की आंखों का तारा और उम्मीदों का केंद्र थी !
शरीर के साथ साथ उसकी मौत ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां राख कर दी हैं !
यह घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और अक्षम्य है

मृतिका मोनिका सिंह (फाईल फोटो)

पुलिस जांच पर टिकी सब की निगाहें :- मोनिका की मौत के बाद अब पुलिस पर आरोपी को सलाखों के पीछे पहुँचाने और मामले को जल्द सुलझाने का भारी दबाव है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि इस ‘फास्ट ट्रैक’ मामले की तरह जांच कर अपराधी को ऐसी सजा दी जाए जो समाज में नजीर पेश करे।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के तमाम दावे फाइलों में तैरते दिख रहे हैं आखिर कब तक असुरक्षित रहेंगी बेटियाँ :- बिश्रामपुर की इस घटना ने एक बार फिर बेटियों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ हम महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं, तो दूसरी तरफ एक सनकी अपराधी की वजह से एक होनहार छात्रा का भविष्य चंद मिनटों में खाक हो जाता है। प्रशासन को अब केवल ‘भरोसे’ से आगे बढ़कर धरातल पर ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि फिर किसी और ‘मोनिका’ को इस तरह अपनी जान न गंवाना पड़े।

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