ग्रामीण क्षेत्रों मे जल जीवन मिशन का बुरा हाल वर्षों से सुखी पड़ी है पानी टंकी…..
CG Samachar24.in
संचालक :-दीपक गुप्ता….✍️
सूरजपुर :- जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘जल जीवन मिशन’ भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों की है जहां वर्षों निर्मित पानी टंकी बुंद बुंद पानी को तरस रहे हैं वहीं इधर सोशल मीडिया पर हर घर पानी पहुचाने के बड़े बड़े बैनर तैर रहे हैं जिस पढ़कर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के रहवासियों मे आक्रोश व्याप्त है ।

बुंद बुंद पानी को तरसता नवनिर्मित पानी टंकी
सुत्रों की अगर माने तो जिले के शहरी क्षेत्रों में हर घर जल पहुचाने की योजना तो सफल है पर ग्रामीण क्षेत्रों मे गर्मी शुरु होते ही पानी के लिऐ हाहाकार मच जाता है और जिम्मेदार अपनी कमियां एक दुसरे पर थोप देते हैं ।

अधुरे पानी टंकी का खड़ा स्ट्रेचर
कई जगह पानी टंकी के अधुरे निर्माण ग्रामीणों मे निराशा :- भैयाथान विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत जूर मे जिस जगह पर पानी टंकी का निर्माण कार्य कराया जा रहा है उसके आसपास स्कूल है विभागीय लापरवाही व ठेकेदार की मनमानी ने मासूम स्कूली बच्चों के जीवन में भी खतरा मंडरा रहा है क्योंकि कई माह बीत जाने के बाद भी सेंटरिंग में लगे लोहे के प्लेट को अभी तक नहीं खोला गया है यदि यह भारी भरकम लोहे के प्लेट अपनी जगह से नीचे गिरेंगे तो निश्चित रूप से एक बड़ी दुर्घटना होने की संभावना है ।
महीनों से निर्माण कार्य बंद है। न पाइपलाइन बिछाई गई और न ही घरों तक नल से जल पहुंचे। विभाग की इस “भूलने की बीमारी” ने ग्रामीणों की उम्मीदों पर विभाग ने पानी फेर दिया है ।
अब आलम यह है कि करोड़ों की लागत से बन रही जल जीवन मिशन योजना के तहत पानी टंकी आज एक ‘सफेद हाथी’ बनकर रह गई है।

गर्मी शुरु होते ही सुखते जल :- चिलचिलाती धूप में मीलों का सफर माह अप्रैल का पारा चढ़ते ही गांव के जलस्तर में भारी गिरावट आई है, जिससे हैंडपंप सूखने लगे हैं ।
सौर सुजला योजना के तहत स्थापित सोलर पंप मे शाम ढ़लते ही टंकी से पानी खत्म हो जा रहे हैं कई सोलर पंप मे तो नल टुट जाने और पाईप फट जाने से पानी व्यर्थ बह रहा है ।
इस संबंध में सौर ऊर्जा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि ग्राम पंचायतों में सौर सुजला योजना के तहत स्थापित पंप , नल , पाइप के रखरखाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों के सरपंच – सचिवों को दे दी गई है स्थापना के पांच वर्ष तक रख रखाव की समस्त जिम्मेदारी विभाग की होती है इस के बाद संबंधित ग्राम पंचायतों को सौप दी जाती है यहां हैरानी की बात है इस की जानकारी ग्राम पंचायतों के सचिवों को नही है

फाईल फोटो
स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव जिम्मेदार कौन…? :- दुरस्त वनांचल क्षेत्रों के ग्रामीण असुरक्षित स्रोतों से निकले ढ़ोढ़ी का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे डायरिया और टाइफाइड जैसे बिमारियों का खतरा बढ़ गया है।
अब देखना यह होगा कि क्षेत्र में प्रशासन अपनी नींद से कब जागता है या फिर इस भीषण गर्मी में ग्रामीण ऐसे ही प्यासे रहेंगे ।

