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विश्व पर्यावरण दिवस विशेष :- 200 एकड़ भूमि में बसा हरियाली का स्वर्ग….

संचालक :- दीपक गुप्ता…✍️

CG Samachar24.in

सूरजपुर / भैयाथान:- विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जहां एक ओर वनों की कटाई और जलवायु परिवर्तन चिंता का विषय बना हुआ है, वहीं सूरजपुर जिले के भैयाथान ब्लॉक में स्थित एक ऐसा उदाहरण सामने आया है, जो न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है, बल्कि जनसहभागिता की शक्ति को भी दर्शाता है।

भैयाथान ब्लॉक मुख्यालय से लगे लगभग 200 एकड़ राजस्व भूमि पर फैला यह हरा-भरा क्षेत्र किसी प्राकृतिक वरदान से कम नहीं। यहां 10,000 से अधिक वृक्ष हैं, जिनमें सबसे अधिक संख्या में साल के वृक्ष हैं। इनके अलावा तेंदू, महुआ, नीम, रोहिणा, औषधीय जड़ी-बूटियों और अन्य दुर्लभ वनस्पतियों से यह क्षेत्र समृद्ध है। यह भूमि ग्राम पंचायत समौली के आश्रित ग्राम लखनपुर और ग्राम पंचायत करकोटी के अंतर्गत आती है, और रेणुका और गोबरी नदी के संगम किनारे स्थित है, जिससे इसकी जैव विविधता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

जंगल को बचाने की अनोखी पहल करीब 25 वर्ष पूर्व, जब यह वन क्षेत्र अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई की चपेट में था, तब गाँव के बुजुर्गों और जागरूक नागरिकों ने इसे बचाने की ठानी। ग्राम वन रक्षा समिति का गठन किया गया, जिसकी अध्यक्षता भाजपा नेता राजीव प्रताप सिंह कर रहे हैं। जो वर्तमान में जनपद पंचायत भैयाथन के उपाध्यक्ष हैं।
ग्राम पंचायत समौली व करकोटी के दो पारा—क्षत्रिय पारा और हरिजन पारा—के लोगों ने मिलकर जंगल की रक्षा का जिम्मा उठाया और परिणामस्वरूप आज 10000 से अधिक पौधे तैयार हो गए।

इस उद्देश्य के लिए गांव वालों ने अपने खर्च पर दो पहरेदार नियुक्त किए, जिन्हें साल भर धान और अनाज के रूप में चंदा देकर आजीविका दी जाती है। आज यह क्षेत्र करीब 150 घरों की बस्ती के सहयोग और समर्पण का परिणाम है।

सरकार से गौ अभयारण्य की मांग :- वन क्षेत्र की सुरक्षा और उसे संरक्षित रखने हेतु भाजयुमो मंडल अध्यक्ष अमन प्रताप सिंह सक्रिय हैं। उन्होंने इस क्षेत्र को गौ अभयारण्य के रूप में विकसित करने की मांग की है। इस सिलसिले में उन्होंने तत्कालीन कलेक्टर दीपक सोनी से भी मुलाकात की थी,हालांकि घेरावा नहीं हो सका। हाल ही में भटगांव विधायक व कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े से भी इस मुद्दे पर चर्चा की।

मंगलवार को मंत्री प्रतिनिधि ठाकुर प्रसाद राजवाड़े ने क्षेत्र का दौरा किया और निर्माणाधीन महादेव मंदिर में सहयोग राशि प्रदान की। उन्होंने आश्वासन दिया कि जंगल की सुरक्षा, घेराव और गौ अभयारण्य की दिशा में सरकार गंभीरता से कार्य करेगी।

पर्यावरण दिवस पर प्रेरणा :- यह पहल एक आदर्श उदाहरण है कि स्थानीय स्तर पर संगठित प्रयास और सामुदायिक भागीदारी से किस तरह प्राकृतिक संपदा को संरक्षित किया जा सकता है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर यह संदेश साफ है—अगर संकल्प हो, तो पर्यावरण की रक्षा संभव है।

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