भैयाथान क्षेत्र के कई पंचायतों में स्वच्छता के नाम पर लाखों रुपए का बंदरबांट , गांवों में निर्मित कचरा प्रबंधन बदहाल….
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संचालक :- दीपक गुप्ता….✍️
भैयाथान :- केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य गांव – गांव तक स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करना और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को बेहतर बनाना है। लेकिन जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत बंजा , सोनपुर, कुर्रीडीह , सहित कई गांवों में इस योजना की जमीनी हकीकत चिंताजनक नजर आ रही है। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद गांवों में स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है।
कागजों में विकास, जमीन पर गंदगी :- ग्राम पंचायतों में बनाए गए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र (कचरा घर ) खुद बदहाली के शिकार हैं। कहीं टीन की छतें गायब हैं, तो कहीं दीवारें जर्जर होकर गिरने की स्थिति में हैं। कई जगह निर्माण के बाद इनका उपयोग तक नहीं किया गया, जिससे यह साफ होता है कि काम केवल कागजों में पूरा दिखाया गया।
जंग खा रही कचरा संग्रहण साइकिलें :- स्वच्छता अभियान के तहत दी गई कचरा संग्रहण साइकिलें इन दिनों गांवों में बेकार पड़ी हैं। महीनों से इनका उपयोग नहीं हो रहा, जिसके कारण नियमित कचरा उठाव बंद है और गांवों में जगह-जगह कचरे के ढेर लग गए हैं।

स्वच्छता केंद्र बना धान खरीदी केंद्र :- कुर्रीडीह गांव में तो स्थिति और भी हैरान करने वाली है। यहां ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र को लगभग तीन महीने तक धान खरीदी केंद्र के रूप में उपयोग किया जाता है। बाद में दीवारों पर फिर से स्वच्छता केंद्र लिखकर इसे कागजों में चालू दिखा दिया जाता है। यह सीधे तौर पर सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग की ओर इशारा करती है।
फंड खर्च पर सवाल, काम नदारद :- ग्रामीणों का आरोप है कि स्वच्छता योजना के नाम पर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस काम नहीं हुआ। कई मामलों में केवल दस्तावेजों में कार्य पूर्ण दिखाकर राशि निकाल ली गई , जिससे भ्रष्टाचार की आशंका गहराती जा रही है।

68 पंचायतों में बना अपशिष्ट पदार्थ केंद्र
शेड :- जानकारी के अनुसार, 68 पंचायतों में कचरा प्रबंधन के लिए शेड बनाए गए हैं लेकिन केवल 28 पंचायतों में ही सफाई का काम चालू है। बाकी पंचायतों में कार्य बंद पड़ा है, जिससे योजना की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
जिम्मेदारी तय करने में प्रशासन मौन :- पूरे मामले में जिम्मेदारी तय नहीं हो पाई है। यह स्पष्ट नहीं है कि ग्राम पंचायत सचिव जिम्मेदार हैं या फिर यह पूरे प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही का परिणाम है। निगरानी व्यवस्था भी संदेह के घेरे में है।
इस संबंध में जनपद पंचायत सीईओ विनय कुमार गुप्ता ने कहा कि सभी पंचायत सचिवों को लिखित निर्देश दिए जाएंगे और कार्यों को जल्द दुरुस्त कराने के लिए कहा जाएगा।
ग्रामीणों की मांग :- इधर स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो स्वच्छता जैसी महत्वपूर्ण योजना पूरी तरह विफल हो जाएगी।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाता है।
