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डिप्लेरिंग से 260 मीटर के इलाके में पड़ी दरारें, जमीन भी धंसी पहाड़ का हिस्सा 5 फीट नीचे समाया….

ग्राउंड रिपोर्ट : भूमिगत खदान को सपोर्ट देने लगाया गया लोहा हटा रहे, खर्च से बचने प्रबंधन नहीं करा रहा सेंड फिलिंग….

CG Samachar 24.in

संचालक :-दीपक गुप्ता….✍️

सूरजपुर :- जिले भैयाथान विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बड़सरा से लगे कोपर – झरिया के पहाड़ में एक महीने पहले करीब 260 मीटर के इलाके में दरार आ गई। एकाएक तेज आवाज और भूकंप के जैसे झटकों के बीच पांच न फीट तक पहाड़ का एक हिस्सा धंस गया। बड़ी-बड़ी चट्टानों के पत्थर दो टुकड़ों में टूट गए और आधा हिस्सा पांच फीट नीचे समा गया। आसपास मवेशी चरा रहे चरवाहे भाग गए। उन्होंने जमीन धंसने की जानकारी न ग्रामीणों को दी।

अगले दिन ग्रामीणों ने मौके पर जाकर देखा, तो षष्टकोण आकार में करीब 260 मीटर पहाड़ – करीब पांच फीट नीचे धंसा मिला। वहीं जमीन धंसने से दो-दो फीट की दरार भी दिखाई दी। इससे हड़कंप मचा गया।

13 जल स्रोत सूखे, जंगली जानवरों का रुख अब गाँव की ओर :- बड़सरा के पन्ना देव पाण्डेय ने बताया कि 20 साल पहले तक कोपर झरिया, ललमट्टा, ग्वालिन के साथ आसपास के जंगलों में 13 से ज्यादा डोंडी और तीन 12 मासी नाला बहते थे। इन्हीं से जंगली जानवर प्यास बुझाते थे। खदान खुलने के 10 साल बाद ही जल स्रोत सूख गए। अब भालू, सियार, जंगली सुअर और खरगोश के साथ दूसरे जानवर गांव की तरफ पानी की तलाश में आते हैं। तीन साल में बंदर भी भूख-प्यास के कारण आक्रामक हो गए हैं।

14 माह पहले पटवाई गई दरारें फिर खुलीं :- करीब 14 महीने पहले भी ललमट्ट्टा इलाके में 100 मीटर लंबी व डेड़-डेढ़ फीट दरार का मामला सामने आया था। इसके बाद जब ग्रामीणों ने विरोध किया, तो प्रबंधन ने आनन-फानन में मिट्टी-सीमेंट से दरारों को पटवाया था। ग्वालिन जंगल में भी ऐसी ही दरारों से ग्रामीण एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ आक्रोशित हैं।
खदान में जारी डिप्लेरिंग (कोयला – खनन के लिए लगाया सपोर्ट हटाने ) के कारण  जिले के ओड़गी का जंगल और पहाड़ पांच-पांच फीट नीचे धंस रहा है। ग्रामीणों को डर है कि आने वाले दिनों में खदान से सटे गांवों में भी दरारें आने लगेंगी और भटगांव की तरह उनका गांव भी – धंसने लगेगा। गांवों में दहशत है और अब ग्रामीण एसईसीएल के खिलाफ कोरिया जिले के झिलमिली भूमिगत लामबंद होने की तैयारी में हैं।

एसईसीएल की मनमानी: जमीन धंसने से रोकने के बजाय दरारों को भरने में जुटा प्रबंधन, लोगों में आक्रोश :- लोगों ने कहा कि एसईसीएल केवल औपचारिकता निभा रहा है ।
ग्रामीण खुदन, परमेश्वर सिंह, राघव ने बताया कि जब भी इलाके में इस तरह की दरारें आती हैं, तो उसे पटवाने के लिए एसईसीएल औपचारिकता निभाते हैं। एक महीना पहले धंसे कोपर झरिया पहाड़ की दरार भी एसईसीएल ने मजदूर लगाकर पटवा दी।

दरार में फंस रहे हैं छोटे जानवर और बकरियां :-
दो से ढाई फीट की दरार आने से जंगल में लगे पेड़-पौधे इसमें समाकर नष्ट हो गए। कई जल स्त्रोत सूख गए। जंगली जानवरों दरार में समा जा रहे हैं। कई बार छोटे मवेशी और बकरियां दरार में फंसी हैं। फिर भी एसईसीएल इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा है।

कोयला निकालने के बाद सेंड फिलिंग जरूरी : एक्सपर्ट :- सरगुजा जिले के भू-गर्भशास्त्री वीवात मुखर्जी ने बताया कि भूमिगत खदान में कोयला निकालने के बाद खोखले एरिया में सेंड फिलिंग करना होता है ताकि भविष्य में जमीन या ऊपरी सतह न धंसे। सेंड फिलिंग करना काफी महंगा होता है इसीलिए कंपनी या मैनेजर इससे बचते हैं। यह एक अपराध भी है ।
उन्होंने आगे कहा कि वहां के इलाके को सुरक्षित करने पूरे खोखले इलाके को एक साथ धंसा दिया जाए, यह भी ऑप्शन है। इससे वहां तालाबनुमा जगह बन जाएगी, जिसमें मछली पालन के साथ दूसरे कई उपयोगी काम भी किए जा सकते हैं।

जमीन क्यों धंस रही है, इसकी जांच कराएंगे: जीएम :- एसईसीएल बैकुंठपुर क्षेत्र के जीएम बीएन झा, ने पत्रकारों से कहा कि जमीन क्यों धंस रही है इसकी जांच करायेंगे कोपर झरिया पहाड़ के एक इलाके में जमीन धंसी है। मैं खुद इसे देखने गया था। दरारों को जल्द से जल्द भरा जाएगा।

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