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लिफ्ट सिंचाई योजना बंद -हाइड्रो पावर प्लांट विद्युत परियोजना द्वारा लगवाए गयें पंप की चोरी – पांच वर्षों से 900 एकड़ भूमि में रबी की फसल नहीं ले पा रहे किसान…

CG Samachar 24.in

संचालक :- दीपक गुप्ता….✍️

सूरजपुर :- जिले के भैयाथान ब्लॉक मुख्यालय से सटे ग्राम पासल के 329 से अधिक किसानों को हाइड्रो पावर प्लांट विद्युत परियोजना के कारण 900 एकड़ के खेतों में सिंचाई का पानी नहीं मिल पा रहा है। पानी नहीं मिलने से रबी सीजन की फसल चौपट हो गई है।

रिहंद नदी पर जल संसाधन विभाग की ओर से संचालित लिफ्ट सिंचाई योजना 15 से 20 साल तक इस क्षेत्र में कृषि की जीवन रेखा बनी रही। अंडरग्राउंड पाइपलाइन से सैकड़ों किसानों के खेतों तक पानी पहुंचता था।
पर कुछ साल पहले हाइड्रो पावर प्लांट विद्युत परियोजना के निर्माण के दौरान सिंचाई व्यवस्था ध्वस्त हो गई। निर्माण के दौरान सिंचाई पंप चोरी हो गई और लिफ्ट सिंचाई बंद हो गई। कंपनी प्रबंधन ने तब वादा किया था कि परियोजना शुरू होने के साथ सिंचाई व्यवस्था फिर से शुरू होगी, लेकिन पांच साल बीतने के बाद भी न तो मशीन लगी और न ही कोई वैकल्पिक समाधान किया गया।

किसानों के खेतों की सिंचाई बंद, अधिकारी नहीं कर रहे समाधान :- पासल के किसान जयंत श्रीवास्तव ने बताया कि पहले लिफ्ट एरिगेशन के जरिए नदी से पानी खेतों तक पहुंचाया जाता था। हाइड्रो पावर प्लांट ने उस क्षेत्र को अपने अधिकार में ले लिया, जिससे अब सिंचाई पूरी तरह बंद है। जब हम कंपनी के जिम्मेदारों से बात करते हैं, तो वे आश्वासन देकर टाल देते हैं। सिंचाई विभाग के अधिकारी किसानों की समस्या सुन ही नहीं रहे हैं। अधिकारी समस्या की जानकारी होने के बाद भी है समाधान का प्रयास नहीं कर रहे हैं।

1 लाख 65 हजार का पंप नहीं खरीद पा रहे कंपनी के अधिकारी ग्रामीणों कर रहे आंदोलन की तैयारी :- आपको बता दें कि महज 1 लाख 65 हजार रुपये का पंप कंपनी के अधिकारी खरीद नही पा रहे हैं जिस कारण कंपनी का वादा किसानों के लिए सिर दर्द बना हुआ है क्षेत्र में लगातार पांच से सात साल तक सिंचाई बंद होने से किसानों की सैकड़ों हेक्टेयर भूमि पर खेती नहीं हो पा रही है। इससे हर साल किसानों को लाखों का नुकसान हो रहा है। गांव के बुजुर्ग किसानों का कहना है कि कभी यही जमीन गांव की समृद्धि का प्रतीक थी। अब सूखे खेतों को देखकर निराशा होती है।

लाखों का नुकसान, खेती छोड़ मजदूरी कर रहे किसान :- किसान जगनारायण सिंह बताते हैं कि पानी की सुविधा नहीं होने से अब रबी सीजन में फसल नहीं होती है। इससे हर साल किसानों को लाखों का नुकसान हो रहा है। खेती का खर्च भी नहीं निकलता। कई किसान खेती छोड़ मजदूरी कर परिवार चला रहे हैं। कई किसान कर्ज में डूब गए हैं। परिणामस्वरूप प्रभावित किसान खेती छोड़ अब मजदुरी करने को विवश हैं ।

पाइपलाइन जस की तस, कनेक्शन बेकार :- सामाजिक कार्यकर्ता विनय पावले ने पत्रकारों को बताया कि ताप विद्युत परियोजना लगने से पहले यह क्षेत्र आत्मनिर्भर था। मोटर चोरी होने के बाद कंपनी ने खुद वादा किया था कि नई मोटर लगाकर किसानों को पानी दिया जाएगा। लेकिन आज पांच साल बीत गए। ग्रामीणों ने कई बार कंपनी और आवेदन दिया, खेतों तक पानी पहुंचाने वाली पाइपलाइन अब भी जस की तस है। मोटर और विद्युत कनेक्शन के अभाव में अब बेकार हो चुकी है।

उन्होंने शासन – प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है ताकि कंपनी के वादों को अमल में लाया जा सके और सिंचाई व्यवस्था दोबारा शुरू हो। कंपनी ने विकास और रोजगार के वादे के साथ परियोजना शुरू की थी, अब यही कंपनी किसानों के लिए सिर दर्द है।

किसानों के हित में कराएंगे कामः पटेल :- इस संबंध में जल संसाधन विभाग सूरजपुर के एसडीओ लोकेश पटेल ने कहा कि मामले की जानकारी मुझे नहीं थी। मामला अब मेरे संज्ञान में आया है। पूरी जानकारी लेकर किसानों के हित में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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