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मोटरसाईकल से परिवहन करते तेदुआ का खाल सहित एक आरोपी गिरफ्तार…

CG Samachar 24.in

संचालक :- दीपक गुप्ता….✍️

सूरजपुर, :- जिले में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ वन विभाग और वाइल्डलाइफ कंट्रोल ब्यूरो की संयुक्त टीम ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। कुदरगढ़-भैयाथान रोड पर चपदा चौक के शिव मंदिर के पास मोटरसाइकिल पर सवार एक व्यक्ति को तेंदुए की खाल के साथ रंगे हाथ पकड़ा गया। मुखबिर की सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए टीम ने खाल जब्त कर आरोपी को हिरासत में लिया और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत कार्रवाई करते हुए उसे जेल भेज दिया। हालांकि, इस सफल कार्रवाई के बावजूद, सूरजपुर वन मंडल की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोग और वन्यजीव विशेषज्ञ विभाग की लचर व्यवस्था और वन्यजीव संरक्षण में नाकामी को लेकर आक्रोशित हैं।

मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर वन मंडल अधिकारी के मार्गदर्शन में वाइल्डलाइफ कंट्रोल ब्यूरो और वन विभाग की संयुक्त टीम ने कुदरगढ़-भैयाथान रोड पर चपदा चौक के पास शिव मंदिर के समीप घेराबंदी की। मोटरसाइकिल पर सवार आरोपी को तेंदुए की खाल के साथ पकड़ा गया। खाल को जब्त कर आरोपी को जिला मुख्यालय लाया गया, जहां वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत कार्रवाई पूरी कर उसे जेल भेज दिया गया।

यह घटना सूरजपुर वन मंडल में वन्यजीव संरक्षण को लेकर बार-बार सामने आ रही कमियों को रेखांकित करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष, वाहनों की चपेट में वन्यजीवों की मौत और तस्करी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। बीते कुछ महीनों में कई वन्यजीवों की मौत की खबरें सामने आईं, लेकिन विभाग की ओर से इन घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जंगल में ‘जंगलराज’ की स्थिति बनी हुई है, और तस्कर बेखौफ होकर अपनी गतिविधियां चला रहे हैं।

तेंदुए की खाल और अन्य अंगों की तस्करी का नेटवर्क न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी सक्रिय है। इनकी मांग अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पारंपरिक दवाओं, सजावटी वस्तुओं और अवैध व्यापार के लिए रहती है। सूरजपुर जैसे घने जंगलों वाले क्षेत्र तस्करों के लिए आसान शिकार बन रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तस्करी रोकने के लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है।

चपदा चौक पर हुई इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने वन विभाग की जवाबदेही पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि तस्करी और वन्यजीवों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। ग्रामीणों ने मांग की है कि विभाग न केवल तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे, बल्कि जंगल की सुरक्षा और निगरानी के लिए प्रभावी कदम उठाए।

यह घटना सूरजपुर वन मंडल में वन्यजीव संरक्षण की गंभीर चुनौतियों को उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि तस्करी रोकने के लिए निगरानी बढ़ाने, स्थानीय समुदाय को जागरूक करने और विभागीय जवाबदेही सुनिश्चित करने की जरूरत है। साथ ही, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए दीर्घकालिक उपायों पर ध्यान देना होगा। बहरहाल वन विभाग इस कार्यवाही से अपनी लापरवाही कहें या बेपरवाही पर पर्दा डालने व वाहवाही बटोरने की कवायद में जुटी हुई तो वहीं दूसरी तरफ स्थानीय रहवासियों की मांग है कि वन विभाग अपनी कार्यशैली में सुधार करे और वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे, ताकि जंगल में ‘जंगलराज’ की कहावत को खत्म किया जा सके।

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