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आदिम जाति सेवा सहकारी समिति सोनपुर मे हमाली मजदुरी को लेकर शिकायत उप – पंजीयक ने कहा आज हो जायेगा भुगतान….

CG Samachar 24.in

संचालक :- दीपक गुप्ता….✍️

सूरजपुर / भैयाथान :- सहकारिता के नाम पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने का दावा करने वाली व्यवस्था भ्रष्टाचार, मनमानी और शोषण का पर्याय बन चुकी है। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्या. सोनपुर के धान खरीदी केंद्र में प्रबंधक सतेश्वर साहू की कथित मनमानी, फर्जीवाड़े और अभद्र व्यवहार ने सहकारी व्यवस्था की नींव हिला दी है। धान खरीदी के दौरान किसानों और हमालों के शोषण, 6 लाख 18 हजार 840 रुपये के बकाया भुगतान से लेकर विधानसभा ध्यानाकर्षण में उजागर अवैध खरीद और निलंबन के बाद संदिग्ध बहाली तक, साहू के कारनामों ने जिले में सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोनपुर समिति का मामला केवल हिमशैल की नोक है। अन्य धान खरीदी केंद्रों पर भी ऐसी अनियमितताओं की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं।समितियो में धान खरीदी के नाम पर करोड़ों रुपये की राशि के गबन की आशंका है। इसके साथ ही सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन और सहकारी विभाग इस मामले में पारदर्शी जांच और कठोर कार्रवाई की हिम्मत दिखाएगा..? सतेश्वर साहू के निलंबन और संदिग्ध बहाली की गुत्थी कब सुलझेगी..? क्या किसानों और हमालों को उनकी मेहनत की कमाई और न्याय मिलेगा…? या फिर सहकारी समितियों में भ्रष्टाचार की गंगा अनवरत बहती रहेगी..? प्रशासन के सामने अब न केवल सोनपुर समिति के मामले को सुलझाने की चुनौती है, बल्कि सहकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी है।

विधानसभा सवाल से निलंबन और रहस्यमयी बहाली :- सहकारी समिति में साहू की मनमानी का आलम यह है कि विधानसभा ध्यानाकर्षण सूचना क्रमांक 03 जब प्रदेशभर में गुंजा तों सूरजपुर जिले में जांच की कड़ी में सोनपुर समिति के प्रबंधक के खिलाफ गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ। इसमें उल्लेख किया गया कि प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति द्वारा छत्तीसगढ़ शासन के भण्डार क्रय नियमों का उल्लंघन करते हुए 10 तारपोलिंग/प्लास्टिक कवर, प्रति नग 7600 रुपये की दर से, बिना वैधानिक प्रक्रिया के खरीदे गए। इस स्पष्ट उल्लंघन की जांच में सतेश्वर साहू, सहायक समिति प्रबंधक, को आदिम जाति कर्मचारी सेवा नियम की कण्डिका 17.1 के तहत 27 फरवरी 2025 को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया था। हालांकि, साहू का निलंबन कब और कैसे बहाल हुआ, यह सवाल अब चर्चा का केंद्र बन गया है। सूत्रों के मुताबिक, निलंबन के बाद उनकी बहाली की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी, और इसे लेकर स्थानीय स्तर पर कई सवाल उठ रहे हैं। क्या उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से साहू को राहत दी गई? या फिर जांच को ठंडे बस्ते में डालकर उनकी बहाली कर दी गई? इन सवालों का जवाब न तो सहकारी विभाग के पास है और न ही जिला प्रशासन के पास, जिससे भ्रष्टाचार को संरक्षण देने की आशंका गहरा रही है।

हमालों का आरोप अब तक नहीं मिली हमाली की राशि :- कुछ दिन पूर्व सोनपुर धान खरीदी केंद्र के हमालों ने जिला प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में अपनी पीड़ा बयां की है। उन्होंने बताया कि धान खरीदी और उठाव कार्य पूरा होने के बावजूद उनका 6,18,840 रुपये का भुगतान अटका हुआ है। हमालों का आरोप है कि खरीदी प्रभारी ने भुगतान के लिए लिखित ब्यौरा साहू को सौंपा और बार-बार अनुरोध किया, लेकिन प्रबंधक ने टालमटोल करते हुए कहा, “मैं निलंबित हूं, तुम्हें कोई भुगतान नहीं कर सकता।”

हमालों ने गंभीर आरोप लगाया कि साहू की मंशा फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए राशि आहरण करने की है। उनका दावा है कि पिछले कई वर्षों से प्रबंधक इसी तरह राशि निकाल लेता है, लेकिन हमालों को भुगतान नहीं करता। साहू पर खरीदी प्रभारी और हमालों के साथ गाली-गलौज और धमकी देने का भी आरोप है। ज्ञापन में बताया गया कि प्रबंधक ने अभद्र टिप्पणी करते हुए कहा, “जहां शिकायत करनी है करो, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।”

जांच के नाम पर विभाग पर लगे लीपापोती के आरोप :- सहकारी समितियों की निगरानी का जिम्मा संभालने वाले उप-पंजीयक सहकारी संस्थाएं, सूरजपुर की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। सूत्रों के मुताबिक, सोनपुर समिति में भ्रष्टाचार की शिकायतों के बावजूद उप-पंजीयक ने केवल कारण बताओ नोटिस जारी कर मामले को रफा-दफा सफा करने की कोशिश की है। यह स्थिति “दूध की रखवाली बिल्ली से कराने” वाली कहावत को चरितार्थ करती है। जानकारों का कहना है कि यदि जिला प्रशासन धान खरीदी केंद्रों पर प्रासंगिक व्यय और अन्य राशि के खर्च की निष्पक्ष जांच कराए तो सहकारी समितियों में व्याप्त भ्रष्टाचार का एक बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। लेकिन प्रशासन की उदासीनता और सहकारी अधिकारियों की मिलीभगत के चलते दोषियों को संरक्षण मिल रहा है।
इस संबंध में अनुविभागीय दंडाधिकारी सागर सिंह राज ने कहा कि इस मामले की जानकारी सुशासन तिहार के माध्यम से प्राप्त हुई थी समिति प्रबंधक को तीन दिवस के भीतर भुगतान करने को कहा गया था शिकायत सही पाए जाने पर विभाग को लिखा जाएगा निलंबन मामले में कहा कि यह विभाग का है बेहतर जानकारी विभाग से प्राप्त होगी।
वहीं सहकारी समिति के उप – पंजीयक बजरंग पैकरा ने बताया कि हमाली मजदूरी भुगतान के लिऐ चेक बनकर तैयार हो गया है आज भुगतान हो जायेगा ।

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