Headlines

कृषि त्यौहार – अच्छी फसल की कामना को लेकर गाँव – गाँव हो रही कठोरी पूजा….

CG Samachar 24.in

संचालक :- दीपक गुप्ता….✍️

सूरजपुर / भैयाथान :- ग्राम्य जीवन की समृद्ध परंपराओं और कृषि संस्कृति को जीवंत बनाए रखने वाले कठोरी पर्व का आयोजन ग्रामीण अंचलों में बड़े हर्षोल्लास से किया गया।

रोग, दरिद्रता और समस्याओं को दूर भगाने और अच्छी बारिश और भरपूर फसल की कामना के साथ महादेव और ग्राम देवताओं की पूजा-अर्चना कर कृषि चक्र की विधिवत शुरुआत की गई। विकासखंड के ग्राम पंचायत बड़सरा, बसकर, खांडापारा, गोविंदगढ़, झंझरीपारा, दनौली, सावारांवा सहित अनेकों गांवों में कठोरी पूजन और प्रत्येक तीसरे वर्ष होने वाली मेघावर पूजा धूमधाम से संपन्न हुई।

ग्रामीणों ने महादेव के चरणों में 5-5 मुट्ठी धान अर्पित कर सांकेतिक जोताई की। पूजा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर अपने श्रद्धा भाव को व्यक्त किया। ग्रामीण बसंत देवांगन ने बताया कि कठोरी पूजन के लिए चंदे से इकट्ठा राशि से बैगा को धोती, 5 नारियल, अगरबत्ती, सिंदूर, घी, गोबर, बकरा और महुआ शराब भेंट की जाती है। किसान बांस की बनी टोकरी में धान व हल-पैना लेकर सकितिक हल चलाते हैं। कठोरी पर्व से जुड़े कई नियम भी हैं। इस दिन सूर्योदय तक कुएं, तालाब, नल या हैंडपंप से पानी भरना वर्जित रहता है। एक दिन पहले ही आवश्यक जल का भंडारण कर लिया जाता है। कठोरी सम्पन्न होने के बाद पूजन जल को घर-घर छिड़काव कर हैंडपंप से पानी भरने की अनुमति मिलती है। उल्लंघन करने पर आर्थिक दंड भी लगाया जाता है।

ग्रामीण आस्था, प्रकृति प्रेम व कृषि का प्रतीक :- भाजपा मंडल अध्यक्ष सुनील साहू ने कहा कठोरी पर्व न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह कृषि कार्य की शुभ शुरुआत का प्रतीक भी है। यह दिन किसानों को खेतों की ओर लौटने और नई ऊर्जा से कृषि कार्य शुरू करने का संदेश देता है। महादेव और ग्राम देवता की पूजा कर किसान अपने औजारों का पूजन कर खेती में जुटते हैं। कठोरी पर्व ग्रामीण आस्था, प्रकृति प्रेम और कृषि संस्कृति का जीवंत प्रतीक है, जो क्षेत्र की पहचान और परंपरा को मजबूती से संजोए हुए है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top