भूमि हथियाने के मामले का हुआ पर्दाफाश विभागीय सतर्कता से बची करोड़ों रुपए की जमीन जालसाज पर मामला दर्ज….
CG Samachar 24.in
संचालक :- दीपक गुप्ता…✍️
सूरजपुर :- जिले के लटोरी तहसील में जमीन हथियाने के लिए बड़े पैमाने पर जाली दस्तावेजों का काला खेल का भंडाफोड़ हुआ है । जिसमें आरोपी रंदिप सिंह ने छत्तीसगढ़ राजस्व मंडल, बिलासपुर के फर्जी आदेश के सहारे सूरजपुर एसडीएम कोर्ट में अपना आवेदन देकर जमीन अपने नाम कराने की भरपूर कोशिश की, लेकिन विभागीय सतर्कता ने उसकी चाल को नाकाम कर दिया कार्यालीन जांच में उक्त दस्तावेज जाली साबित हुए और जयनगर थाने में रंदिप के खिलाफ उक्त सारे मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 336 (3), 337, 338 और 340 के तहत फर्जीवाड़े का मामला दर्ज किया गया। मामले पर प्राप्त जानकारी के अनुसार रंदिप सिंह ने राजस्व मंडल के कथित आदेश (प्रकरण क्रमांक M/विविध/26/R/B-121/95/2023, दिनांक 04.10.2023) की जाली प्रति एसडीएम कोर्ट में पेश की। एसडीएम ने प्रकरण (रा.प्र.क्र.202402260300187/अ-63/2023-24 और सह रा.प्र.क्र. 202508260300059/अ-63/2024-25) दर्ज कर जांच शुरू की। राजस्व मंडल, बिलासपुर के पत्र (क्रमांक 332/ निज सचिव/रा.मं./2024, दिनांक 09.09.2024) से जालसाजी की पुष्टि हुई। इसके बाद तहसीलदार लटोरी के आवेदन पर एसडीएम सूरजपुर के कुशल नेतृत्व में आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है लेकिन उक्त मामले खबर लिखे जाने तक आरोपी के गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है ।

वैसे जिले में जमीन हड़पने के फर्जीवाड़े का कोई यह नया मामला नहीं है चूंकि हमारा जिला आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है इस जिले में भू-माफिया और दलाल फर्जी दस्तावेजों के सहारे जिले में कई खेल खेलते रहते हैं स्थानीय लोगों का कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड के डिजिटलाइजेशन के बावजूद भी सिस्टम व विभागीय गठजोड़ से मौजूद खामियों का फायदा ये ‘पेपर किंग्स’ उठाते हैं। इस मामले में एसडीएम कोर्ट की त्वरित कार्रवाई ने करोड़ों की जमीन बचाई, लेकिन सवाल उठता है कि प्रशासन भू- माफियाओं पर नकेल कब कसेगी जो कि एक गंभीर और बड़ा सवाल है…..?
जिले के एसडीएम कोर्ट की सजगता और एफआईआर से लोगों में प्रशासन की खूब तारीफ तो हो रही है, लेकिन पुराने लंबित मामलों और भू-माफियाओं के गठजोड़ पर कार्रवाई का इंतजार लोगों में अब भी बना हुआ है। फर्जीवाडे में हुई यह एफआईआर भू-माफियाओं के लिए एक सख्त चेतावनी तो है और साथ ही साथ यदि किसी भी प्रकार की जालसाजी की, तो जेल जाना तय है लेकिन कितने मामलों में अब भी कई मामले जांच के नाम पर कई महीनों या वर्षों तक लंबित भी भी पड़ी हुई है जो एक ओर बड़ा सवाल है ।
