Headlines

अब बैंक में भी सुरक्षित नहीं है ग्राहकों का पैसा, इससे पहले भी कई ग्राहकों के साथ हो चुकी है गड़बड़ी….

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक का है मामला….

संचालक :- दीपक गुप्ता….✍️

CG Samachar 24.in

सूरजपुर :- छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक अब ग्राहकों का पैसा सुरक्षित नहीं रख पा रहा है। बैंक प्रबंधन की लापरवाही से अब ग्राहकों के बगैर बैंक जाए ही राशि आहरित हो रही है। इतना ही और भी कई तरह की अनियमितता बैंक प्रबंधन द्वारा बरती जा रही है। कहीं की बैंक बीसी आईडी कहीं चल रही है तो कहीं बैंक बीसी द्वारा हजार में दस से बीस रूपए तक खाते से ही चार्ज के नाम पर काटा जा रहा है।
इस संबंध में बताया जाता है कि भैयाथान विकासखंड के ग्राम पंचायत कुर्रीडीह की आदिवासी महिला इन्द्रकुंवर विगत 5 तारिख को अपनी बेटी के घर अपने नातिन के घर इलाज कराने गई थी। जिला चिकित्सालय सूरजपुर में नातिन परी सिंह का इलाज चला और 9 तारीख को वापस अपने घर कुर्रीडीह घुईपारा आ गई। गत दिवस 12 तारीख को जब वह ग्राम पंचायत बड़सरा स्थित बैंक बीसी के पास अपने खाते का पैसा निकालने पहुंची तो बैंक बीसी ने बताया कि उसके खाते से 9 तारीख को 3 हजार रूपए का आहरण हुआ है। जिस पर महिला चौंक गई और उसके साथ इस तरह की घटना पहले भी हो चुकी है। बैंक प्रबंधन से इसकी शिकायत करने पर आदिवासी महिला को डांट डपट कर भगा दिया जाता है। इस बार पुनः उसके खाते से राशि निकलने पर उसने इसकी शिकायत कलेक्टर सूरजपुर से की है। कलेक्टर को दिए गए आवेदन में उसने बताया है कि बैंक में उपलब्ध सीसी टीवी फुटेज के आधार पर उसके खाते से राशि आहरण की जांच कराई जाए। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक से महिला ग्राहक का भरोसा उठ गया है।

ग्राहकों से वसूल रहे अतिरिक्त राशि :- शिकायत  मे उल्लेख किया गया है कि भैयाथान और दर्रीपारा ग्रामीण बैंक द्वारा नियुक्त बैंक बीसी द्वारा प्रति हजार 10 से 20 रूपए की वसूली की जा रही है। चेंज ना होने पर बैंक बीसी द्वारा ग्राहकों के खातों से 1010, 2020, 3030 इस प्रकार के राशि का आहरण किया जा रहा है। बैंक बीसी के सेटलमेंट एकाउंट की जांच कराए जाने के उपरांत ग्राहकों से भी उक्त तरह के ट्रांसजेक्शन के बारे में भी पूछताछ की जाए तो सब कुछ दुध का दुध और पानी का पानी हो जाएगा।
कहीं का के ओ कहीं संचालित हो रहा – छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक दर्रीपारा और भैयाथान द्वारा बैंक बीसी की नियुक्ति धड़ल्ले से की गई है। जिसमें यह भी नहीं देखा गया है कि जिस स्थान के लिए बैंक बीसी की नियुक्ति की गई है वहां उसके द्वारा ग्रामीणां को सेवा दी जा रही या अन्यत्र कहीं सेवा के नाम पर मेवा खाया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि इसमें बैंक प्रबंधन की भूमिका खुद ही सवालों के घेरे में है ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top