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राजस्व विभाग के रिश्वतखोर बाबू को एसीबी की टीम ने 25 हजार रुपए के साथ रंगेहाथ किया गिरफ्तार….

CG Samachar24.in

संचालक :- दीपक गुप्ता….✍️

सूरजपुर :- जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो ने एक बार फिर सख्ती दिखाते हुए तहसील कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-2 बाबू जोगेश्वर राजवाड़े को 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई सोमवार 21 जुलाई 2025 को तहसील कार्यालय सूरजपुर में की गई, जिसने राजस्व विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर कर दिया। एसीबी की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, वहीं स्थानीय लोगों ने इसकी सराहना करते हुए राजस्व विभाग में सुधार की मांग तेज कर दी है। वहीं दूसरी तरफ एसीबी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ग्राम केशवनगर, तहसील व जिला सूरजपुर निवासी धनेश्वर राम पैकरा ने अम्बिकापुर स्थित एसीबी कार्यालय में शिकायत दर्ज की थी। शिकायत में बताया गया कि धनेश्वर ने वर्ष 2008 में अपनी पत्नी के नाम पर खरीदी गई भूमि (पट्टा हक नंबर 25) को अपने पुत्र और पुत्री के नाम पर रजिस्ट्री करवाकर नामांतरण कराया था। लेकिन, उनके पुत्र का 2018 में आकस्मिक निधन हो गया और पुत्री का विवाह होने के बाद वह ससुराल चली गई। इसके बाद धनेश्वर ने उक्त भूमि को अपने नाम पर नामांतरण कराने के लिए तहसील कार्यालय सूरजपुर में आवेदन दिया।

आरोपी – रिश्वतखोर बाबू जोगेश्वर राजवाड़े

आवेदन पर कार्रवाई न होने पर धनेश्वर ने तहसील कार्यालय में पदस्थ बाबू जोगेश्वर राजवाड़े से संपर्क किया। इस दौरान जोगेश्वर ने नामांतरण के लिए 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। धनेश्वर रिश्वत देने के बजाय बाबू को रंगे हाथों पकड़वाना चाहते थे। उनकी शिकायत पर एसीबी ने सत्यापन के दौरान मोलभाव कर रिश्वत की राशि 25 हजार रुपये तय की। इसके बाद, 21 जुलाई 2025 को एसीबी ने तहसील कार्यालय में ट्रैप ऑपरेशन चलाया और जोगेश्वर राजवाड़े को 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए धर दबोचा। कुल मिलाकर एसीबी की इस कार्रवाई ने सूरजपुर ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत संदेश दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले में और क्या खुलासे सामने आते हैं और क्या अन्य भ्रष्ट अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा जाएगा।

एसीबी ने आरोपी जोगेश्वर राजवाड़े को गिरफ्तार कर लिया है और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) की धारा 7 के तहत कार्रवाई शुरू की गई है। एसीबी ने रिश्वत की राशि और संबंधित दस्तावेज जब्त कर लिए हैं।

उक्त कार्यवाही की जानकारी लोगों को लगते ही सूरजपुर में राजस्व विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर लोगों का गुस्सा सातवे आसमान पर आ गया। स्थानीय रहवासियों ने कहा, पटवारी कार्यालय से लेकर तहसील सहित राजस्व विभाग के अन्य कार्यालयों में छोटे-मोटे काम के लिए भी रिश्वत मांगी जाती है। यह कार्रवाई उन भ्रष्ट अधिकारियों के लिए सबक है जो आम लोगों का शोषण करते हैं।

इस घटना ने एक बार फिर तहसील कार्यालयों में भ्रष्टाचार की गहरी पैठ को उजागर किया है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सरकार को राजस्व विभाग में डिजिटल और पारदर्शी प्रक्रियाओं को लागू करना चाहिए ताकि आम जनता को रिश्वतखोरी का सामना न करना पड़े। कुछ लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि तहसील कार्यालयों में शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत किया जाए।

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