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एसईसीएल (SECL) कर्मी पर नौकरी के नाम पर ठगी और शोषण का आरोप; गिरफ्तारी न होने पर आदिवासी युवती ने दी आत्मदाह की चेतावनी…..

CG Samachar 24.in

संचालक :- दीपक गुप्ता…✍️

रायपुर / कोरबा :- कोरबा जिले के बाकीमोंगरा थाना क्षेत्र में रहने वाली एक आदिवासी युवती ने साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के कर्मी दीनदयाल गुप्ता (59) पर 2 लाख रुपये की ठगी और शोषण का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस कप्तान सिद्धार्थ तिवारी के निर्देश पर आरोपी के खिलाफ BNS की धारा 318(4) और 74 के तहत अपराध दर्ज कर लिया गया है।

लेकिन मामला दर्ज होने के बाद भी आरोपी की अब तक गिरफ्तारी नहीं होने से पीड़िता भयभीत है और उसने इस संबंध में आईजी बिलासपुर रेंज संजीव शुक्ला से मुलाकात कर सुरक्षा की मांग की है।

कैसे हुआ मामला शुरू — 5 लाख की मांग, 2 लाख नकद लेने का आरोप :-

मिली जानकारी के अनुसार, एसईसीएल की बलगी परियोजना में पंप ऑपरेटर के पद पर कार्यरत दीनदयाल गुप्ता की मुलाकात पीड़िता से 20 मार्च 2025 को हुई थी।
पीड़िता का आरोप है कि दीनदयाल ने उसे एसईसीएल (SECL) में नौकरी दिलाने का लालच देकर 5 लाख रुपये की मांग की थी।

युवती ने अपनी पैतृक जमीन गिरवी रखकर 2 लाख रुपये नकद आरोपी को दे दिए।
लेकिन न नौकरी लगी न पैसे वापस मिले और दीनदयाल बार-बार 3 लाख रुपये और देने का दबाव बनाता रहा।

पीड़िता का आरोप: पैसे माँगने गई तो “रात साथ बिताने” का ऑफर, मना करने पर जबरदस्ती की कोशिश :- पीड़िता ने बताया कि जब उसने अपने 2 लाख रुपये वापस मांगे, तो दीनदयाल ने उसे अपने घर (DQ-M-8, बलगी कॉलोनी) बुलाया।
वहां आरोपी ने कहा कि “जब तक 3 लाख बकाया नहीं दोगी, नौकरी कैसे लगवाऊँ?”

पीड़िता का दावा है कि इसके बाद दीनदयाल ने उसे एक रात उसके साथ सोने का प्रस्ताव दिया, और विरोध करने पर उसके साथ जबरन शोषण की कोशिश की।

एसपी के निर्देश पर एफआईआर लेकिन गिरफ्तारी नहीं :- आदिवासी युवती की शिकायत पर पुलिस कप्तान सिद्धार्थ तिवारी ने तत्काल मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए।
इसके बाद बाकीमोगरा थाना प्रभारी ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस (BNS) की धारा 318(4), 74
ठगी व महिला शोषण का मामला पंजीबद्ध कर जांच शुरू की है।

लेकिन आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं।

दबाव और धमकी का आरोप — “केस वापस ले लो, नहीं तो फँसा देंगे” :- पीड़िता ने आईजी संजीव शुक्ला को बताया कि दीनदयाल गुप्ता और उसका बेटा लगातार केस वापस लेने का दबाव बना रहे हैं।
स्थानीय थाना स्टाफ भी कह रहा है कि अगर केस वापस नहीं लिया तो किसी भी प्रकरण में फँसा देंगे।
बाकीमोंगरा थाना के कर्मचारी सीएस वैष्णव ने अपने निजी नंबर 6264991845 से फोन कर दबाव डाला।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि गुप्ता पिता-पुत्र का दावा है ।
“हम इतना पैसा खर्च कर चुके हैं कि पुलिस हमें छू भी नहीं सकती।”

गिरफ्तारी न होने पर आत्मदाह की चेतावनी
पीड़िता ने सोशल मीडिया में वीडियो जारी कर कहा—
“अगर एक सप्ताह के भीतर दीनदयाल गुप्ता को गिरफ्तार नहीं किया गया,
तो मैं आईजी ऑफिस के सामने आत्मदाह कर लूंगी।”
जिसके बाद प्रशासनिक हलकों में खलबली मची है।

क्या कहती है पुलिस…? :-
पुलिस कप्तान सिद्धार्थ तिवारी ने कहा है कि महिला संबंधित अपराधों में सख्त कार्रवाई की जाएगी
जांच निष्पक्ष होगी।किसी तरह का दबाव स्वीकार नहीं।
साठ दिनों का समय है, जल्द कार्यवाही की जाएगी।

लेकिन सोशल मीडिया में उठ रहे सवाल है एफआईआर
(“FIR ) के कई दिन बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं…?”

पीड़िता का बड़ा दावा — कॉल डिटेल निकलने पर खुलेंगे राज :-

पीड़िता का कहना है कि “दीनदयाल और उसके बेटे की कॉल हिस्ट्री निकल जाए,
तो कई पुलिसकर्मियों की मिलीभगत सामने आ जाएगी।”

इस आरोप से पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल पैदा हो रहे हैं।

अब सब की निगाहें एसपी कोरबा पर :-

मामला :- आदिवासी युवती के आवेदन पर एक्ट्रोसिटी एक्ट नहीं लगाया गया?
एसईसीएल कर्मचारी को खुली छूट मामले को दबाने का आरोप?
कथित पुलिस की मिलीभगत उस पर कार्यवाही कब?
एफआईआर (FIR) के बाद भी गिरफ्तारी नहीं?
पीड़िता द्वारा आत्मदाह की चेतावनी?

इन सबके कारण मामला बेहद संवेदनशील हो चुका है।

अब देखना है कि पुलिस कप्तान कोरबा क्या ठोस कार्रवाई करते हैं और पीड़िता को न्याय मिलता है या नहीं।

एसईसीएल कर्मचारी दीनदयाल गुप्ता पर नया खुलासा — “पिता का नाम भी समारू बताकर नौकरी लेने का आरोप”

कोरबा एसईसीएल के पंप ऑपरेटर दीनदयाल गुप्ता पर नौकरी के नाम पर ठगी और दुष्कर्म की कोशिश जैसे गंभीर आरोपों के बाद अब एक और बड़ा खुलासा सामने आया है। पीड़िता द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजो और ग्रामवासियों से मिली जानकारी के अनुसार, दीनदयाल गुप्ता ने एसईसीएल में नौकरी लेने के लिए अपने पिता का नाम समारू बताया था — जबकि इसी नाम से ग्राम चैनपुर, दीपिका निवासी समारू के तीन वास्तविक पुत्र पहले से मौजूद हैं।

ग्रामीणों का दावा — असली समारू के तीन पुत्र: गेंदराम, संतराम और बहोरन
पीड़िता द्वारा प्रस्तुत आधार कार्ड व अन्य दस्तावेज़ों के अनुसार:
समारू ग्राम चैनपुर, दीपिका (कोरबा) निवासी हैं।
उनके तीन पुत्र हैं – गेंदराम ,संतराम और
बहोरन हैं तीनों का एक ही आधार नंबर श्रेणी में मिलना और दस्तावेज़ों में एक जैसा पता मिलने से स्पष्ट है कि समारू एक ही व्यक्ति हैं और उनके केवल तीन बेटे हैं।

दीनदयाल गुप्ता भी बता रहा अपने पिता का नाम: “समारू”

दूसरी ओर एसईसीएल (SECL) का आरोपित कर्मचारी दीनदयाल गुप्ता, जिसने ठगी और शोषण के आरोपों पर स्वयं एक लिखित बयान पुलिस को दिया था, उसने भी अपने पिता का नाम समारू लिखा है।

उसके द्वारा पुलिस को दिए गए बयान (25 अप्रैल 2025) की प्रति में स्पष्ट लिखा है:

“दीनदयाल पिता समारू… SECL बलगी खदान में पंप ऑपरेटर”
यानी पिता का नाम वही — समारू।
दो ‘समारू’ या फर्जी दावा? कई सवाल खड़े

अब मामला उलझ गया है।
ग्राम चैनपुर दीपिका के गेंदराम ने बयान दिया है कि मेरे समारू के तीन ही बेटे हैं।
दीनदयाल गुप्ता का नाम इनमें कहीं नहीं आता।
यह गंभीर सवाल उठता है:
क्या SECL कर्मचारी दीनदयाल गुप्ता ने नौकरी पाने के लिए फर्जी पिता का नाम उपयोग किया?
क्या SECL सेवा पुस्तिका (Service Book) में भी यही नाम दर्ज है?
क्या यह नियुक्ति फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर हुई?
यदि यह आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो यह SECL में नियुक्ति धोखाधड़ी (Employment Fraud) का बड़ा मामला बन सकता है।

पीड़िता का दावा — “दीनदयाल ने झूठी पहचान बनाकर नौकरी पाई, अब उसी पहचान का दुरुपयोग कर रहा है”
पीड़िता ने IG बिलासपुर और SP कोरबा से मुलाकात के दौरान यह अतिरिक्त आरोप लगाया कि:
दीनदयाल गुप्ता ने फर्जी परिवारिक पहचान के आधार पर नौकरी ली
अब उसी पहचान और SECL कर्मचारी होने के प्रभाव से पीड़िता को धमका रहा है।
केस वापस लेने का दबाव बना रहा है।
स्थानीय पुलिसकर्मियों से सांठगांठ का दावा करता है।
अहम सवाल जिनकी जांच जरूरी SECL की सर्विस बुक में पिता का नाम क्या दर्ज है?
नियुक्ति के समय उसने कौन-से प्रमाण पत्र दिए थे?
क्या ग्राम चैनपुर दीपिका निवासी असली समारू के परिवार में दीनदयाल नाम का कोई व्यक्ति है?
क्या यह मामला “फर्जी पूर्वज दावे” द्वारा सरकारी/PSU नौकरी हड़पने” की श्रेणी में आता है?

पुलिस व SECL प्रबंधन से कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों और पीड़िता ने मांग की है कि SECL प्रबंधन नियुक्ति दस्तावेज़ों की जांच करे पिता के नाम से जुड़े सभी प्रमाण पत्र व सत्यापन रिकॉर्ड पब्लिक डोमेन में लाए जाएँ
पुलिस धारा 420, 468, 471 (फर्जी दस्तावेज़, जालसाजी) नए नियम BNS के तहत अलग FIR दर्ज करें।

निष्कर्ष :- SECL कर्मचारी दीनदयाल गुप्ता के खिलाफ पहले से ही ठगी,
नौकरी के नाम पर अवैध वसूली, और शारीरिक शोषण की कोशिश
जैसे गंभीर आरोप दर्ज हैं।

अब “फर्जी पिता का नाम बताकर नौकरी लेने” का नया आरोप सामने आने से पूरा मामला और पेचीदा हो गया है। यह खुलासा न सिर्फ SECL की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है बल्कि इस बात पर भी कि क्या PSU में अब तक नियुक्ति सत्यापन प्रक्रिया कमजोर है?
स्थानीय लोगों का आरोप — “आखिर कितने में बिके होंगे पुलिस अधिकारी -कर्मचारी…?” पीड़िता के समर्थन में आगे आए कई स्थानीय ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण को लेकर गहरी नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद दीनदयाल गुप्ता की अब तक गिरफ्तारी न होना कई सवाल खड़े करता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि “अगर किसी गरीब का अपराध होता, तो पुलिस उसी दिन घर तोड़कर ले जाती। लेकिन SECL के कर्मचारी पर केस दर्ज होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। आखिर कितने में बिके होंगे पुलिस अधिकारी – कर्मचारी?”

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि थाना स्तर पर पीड़िता पर केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है
आरोपी खुलेआम घूम रहा है
और पुलिस कार्रवाई की बजाय समझौते की कोशिश में लगी दिखाई दे रही है
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच जिला स्तर या रेंज स्तर की विशेष टीम से कराई जाए, ताकि “पुलिस-प्रभाव” की संभावना समाप्त हो और पीड़िता को निष्पक्ष न्याय मिल सके।

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