100 साल तक खेत नहीं डूबने का दावा 1 साल में ही फेल किसानों की फसल डूबी, प्रशासन ने जांच हेतु भेजा जल संसाधन विभाग को….
CG Samachar 24.in
संचालक :- दीपक गुप्ता….✍️
सूरजपुर :- भैयाथान क्षेत्र के रेहर नदी पर बनी रेहर-1 लघु जल विद्युत परियोजना को लेकर किसानों की पुरानी आशंका अब सच्चाई में बदल गई है। वर्ष 2024 में परियोजना की शुरुआत के दौरान जब किसानों ने खेत डूबने की संभावना जताई थी, तब छत्तीसगढ़ हाइड्रो पावर एलएलपी ने लिखित रूप से दावा किया था कि डिजाइन इतना मजबूत है कि आगामी 100 वर्षों तक जलभराव की कोई स्थिति नहीं बनेगी।
लेकिन 2025 के मानसून में हुई पहली बारिश ने ही कंपनी के दावे की पोल खोल दी। रेहर नदी में दो बार जलभराव की स्थिति बनी और इसके चलते पासल सहित आसपास के गांवों के 100 एकड़ से अधिक खेत पानी में डूब गए। धान की फसलें बर्बाद हो गईं, जिससे किसानों का आक्रोश फूट पड़ा है।

हाइड्रो पावर कंपनी ने 5 अप्रैल 2024 को दिए लिखित आश्वासन पत्र में कहा था कि परियोजना का डिजाइन 100 वर्षों की अधिकतम संभावित बाढ़ को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। बैराज का जलस्तर अधिकतम 494.50 मीटर तक रहेगा, जबकि खेत 488 मीटर से ऊपर स्थित हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की डुबान की आशंका नहीं है।
लेकिन हकीकत कुछ और ही सामने आई। दो बार जलभराव की स्थिति में 100 एकड़ खेतों में पानी भर गया। किसानों ने सवाल किया है कि जब डिजाइन 100 साल की सुरक्षा का दावा करता था, तो एक साल में ही फसलें कैसे डूब गईं? अब इसका जवाब कौन देगा?”
प्रशासन हरकत में, तीन सदस्यीय जांच समिति गठित :- मामला मीडिया और जनदर्शन के जरिए प्रशासन तक पहुंचा, जिसके बाद राजस्व निरीक्षक के नेतृत्व में तीन सदस्यीय तकनीकी जांच समिति गठित की गई। समिति ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया और रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी है, जिसमें 50 एकड़ से अधिक फसल क्षति की पुष्टि की गई है। इसी के आधार पर मुआवजा प्रक्रिया की शुरुआत होगी।

एसडीओ पहुंचे स्थल पर कंपनी नहीं दिखा सकी दस्तावेज :- जल संसाधन विभाग सूरजपुर के एसडीओ लोकेश पटेल ने हाइड्रो प्रोजेक्ट स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने हाइड्रो पावर के अधिकारी संतोष सिंह से डायवर्जन और बांध की ड्राइंग डिज़ाइन की मांग की, परंतु कंपनी ने बताया कि दस्तावेज रायपुर में हैं। ऐसे में तकनीकी जांच अधूरी रह गई।
किसानों की मांग हो तकनीकी लापरवाही की जांच, मिले समुचित मुआवजा :- किसान विजय श्रीवास्तव, सुधीर श्रीवास्तव, मिथलेश कुशवाहा, रामकिशन कुशवाहा, रामेश्वर देवांगन, विमला कुमारी ने कहा कि कंपनी के झूठे दावों की जांच हो,डिज़ाइन की स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा कराई जाए,फसल क्षति का शीघ्र समुचित मुआवजा दिया जाए तथा भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं न हों, इसके लिए स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए।
इस संबंध में हाइड्रो पावर प्लांट, पासल के जीएम प्रकाश मिश्रा ने कहा कि कोई तकनीकी गलती नहीं थी बल्कि जल आपदा थी। चंबोथी नाले के पानी को किनारे से डायवर्ट किया गया था जिसमें कुछ तकनीकी त्रुटि थी जिसे सुधार लिया गया है।
