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8 वी कक्षा की छात्रा से तीन युवकों ने की थी गलत हरकत गुड टच बैड टच जागरूकता अभियान के दौरान छात्रा ने शिक्षिका को सुनाई आप बीती आईपीसी एक्ट के तहत मामला दर्ज….

CG Samachar 24.in

संचालक :- दीपक गुप्ता….✍️

सूरजपुर :- जिले के दुरस्त वनांचल क्षेत्र से एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई है, जिसने हर किसी के रोंगटे खड़े कर दिए। चांदनी थाना क्षेत्र की एक आठवीं कक्षा की मासूम छात्रा ने स्कूल में आयोजित गुड टच-बेड टच जागरूकता कार्यक्रम के बाद हिम्मत जुटाकर अपनी शिक्षिका को अपने साथ हुई हैवानियत की दास्तां सुनाई। उसने खुलासा किया कि करीब एक साल पहले तीन युवकों ने अलग-अलग समय पर उसका शारीरिक शोषण किया। इस घटना ने न केवल स्थानीय समुदाय को हिलाकर रख दिया, बल्कि समाज के सामने बच्चों की सुरक्षा और जागरूकता का गंभीर सवाल भी खड़ा कर दिया। बहरहाल यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए सिर्फ कानूनी ढांचा ही काफी नहीं है। स्कूलों, परिवारों और समुदायों को मिलकर एक ऐसा माहौल बनाना होगा, जहां बच्चे बिना डर के अपनी बात कह सकें। यह मामला न केवल हैवानियत के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि जागरूकता और संवेदनशीलता समाज को और बेहतर बना सकती है।

छात्रा ने शिक्षिका को बताया कि स्कूल में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम ने उसे अपनी पीड़ा को बयां करने का साहस दिया। उसने बताया कि तीन युवकों ने अलग-अलग मौकों पर उसके साथ गलत हरकतें की, जिसे उसने अब तक डर और शर्म के कारण दबा रखा था। शिक्षिका ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल बच्ची के परिजनों और जिला बाल संरक्षण इकाई को सूचित किया। काउंसलिंग के दौरान बच्ची ने साफ तौर पर अपनी आपबीती बयां की, जिसके आधार पर चांदनी थाने में तीनों आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट 2012 और भारतीय दंड संहिता ( आईपीसी) की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।

मामले में प्राप्त जानकारी अनुसार जिला पुलिस अधीक्षक ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत एक विशेष जांच टीम गठित की। पुलिस ने आरोपियों की तलाश तेज कर दी है और दावा किया है कि जल्द ही तीनों को गिरफ्तार कर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने यह भी सुनिश्चित किया है कि पीड़िता की पहचान और गोपनीयता पूरी तरह सुरक्षित रखी जाएगी। साथ ही, बच्ची और उसके परिवार को हरसंभव सुरक्षा और सहायता प्रदान की जा रही है।

इस घटना ने समाज में बच्चों के मौन रहने के पीछे के कारणों को उजागर किया है। डर, शर्मिंदगी और भरोसे के अभाव में बच्चे अक्सर ऐसी घटनाओं को छिपा लेते हैं। लेकिन इस मामले में स्कूल के जागरूकता कार्यक्रम ने बच्ची को अपनी बात कहने की हिम्मत दी। यह घटना इस बात का जीता-जागता सबूत है कि सही माहौल और जागरूकता बच्चों को अपनी आवाज उठाने के लिए प्रेरित कर सकती है।

कानून विशेषज्ञों का कहना है कि पॉक्सो एक्ट जैसे कानून बच्चों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत ढाल हैं, लेकिन समाज की जागरूकता और सक्रियता उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। स्कूलों और समुदायों में नियमित रूप से गुड टच-बेड टच जैसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना बच्चों को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है। विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि बच्चों को सुरक्षित माहौल और भरोसेमंद मंच उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

फिलहाल, पीड़ित की काउंसलिंग विशेषज्ञों की देखरेख में जारी है। जिला प्रशासन, पुलिस और बाल संरक्षण इकाई मिलकर बच्ची और उसके परिवार को हरसंभव सहायता प्रदान कर रहे हैं। बच्ची को सखी सेंटर में रखा गया है, जहां उसकी मनोवैज्ञानिक स्थिति और भावनात्मक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बाल संरक्षण अधिकारी लगातार परिवार के संपर्क में हैं और उनकी सुरक्षा व सहायता के लिए हर कदम उठाया जा रहा है।

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