आवारा मवेशियों का सड़कों पर जमावड़ा शुरु फसलों को कर रहे हैं नुकसान दुर्घटनाओं मे भी हो रहा इजाफा….
CG Samachar 24.in
संचालक :- दीपक गुप्ता…✍️
सूरजपुर :- जिला मुख्यालय सहित जिले के नेशनल हाईवे , ग्रामीण सड़कों , चौक चौराहे पर खुले में घूम रहे गोवंशों की वजह से आए दिन सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही है,इन सड़क दुर्घटनाओं में आम नागरिकों के साथ-साथ गौ वंशो को भी शारीरिक क्षति का नुकसान हो रहा है, इतनी सड़क दुर्घटनाओं के बावजूद भी जिम्मेदारों की चुप्पी एक गंभीर सवाल पैदा करती है लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं के बाद भी शासन और प्रशासन खुले में घूम रही गोवंशों, और सड़कों पर बैठने वाली गौ वंश के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है, पशु मालिक भी गायों को उपयोग करने के बाद खुले में छोड़ देते हैं, जिसके चलते गाये सड़कों पर आ जाती है, गोवंश की सड़क दुर्घटनाओं के चलते कई ग्रामीणों के द्वारा कई ग्राम पंचायत में पूर्ववर्ती सरकार के द्वारा चलाई जा रही गोठान योजना, गोबर खरीदी योजना को पुनः शुरू करने की मांग भी रखी गई, क्योंकि कहीं ना कहीं गोठान एवं गोबर खरीदी के चलते खुले में घूमने वाली गायों का रख रखाव पशु मालिकों के द्वारा घरों पर किया जा रहा था ।

लेकिन जब से यह योजनाएं बंद हुई है, एक बार फिर से पशु मालिकों ने गायों को खुले में छोड़ दिया है, जिसके चलते आए दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही है, राहगीरों और वाहन चालकों को सड़कों पर वाहन चलाने में दिक्कतें आ रही हैं और वही इन दुर्घटनाओं में गोवंश भी लगातार घायल एवं मृत्यु हो रही है, और अक्सर दुर्घटनाएं रात्रि में होती है क्योंकि रात्रि में सड़कों पर बैठी गाये एकदम से दिखाई नहीं देती हैं और जब तक वाहन चालक को गाये नजर आती है तब तक कई बार बीच बचाव करने का मौका तक चालकों को नहीं मिल पाता। शासन की ओर से गायों के संरक्षण के लिए कई योजनाएं चलाई जाती है कई बार रोका छेका भी किया जाता है लेकिन यह सब योजनाएं और अभियान सिर्फ कागजों पर ही पूर्ण संचालित होते हैं, धरातल पर उनकी भूमिका दिखाई नहीं देती है गायों की दुर्दशा ऐसी है कि उन्हें पेट भरने के लिए झिल्ली और खड्डो पर निर्भर रहना पड़ता है गाय की राजनीति ने कई पार्टियों को बहुत कुछ दिया, विपक्ष से पक्ष तक पहुंचा दिया,लेकिन गाय धरातल पर आज भी भटक रही है। गायों के संरक्षण के लिए गौठानों के पुन संचालन की आवाज उठ रही है ।

आवारा गौ वंश फसलों को भी पहुंचा रहे हैं नुकसान :- ग्रामीण क्षेत्रोँ के किसान बताते हैं कि इन बारिश के दिनों मे खेतों मे किये गये धान के थहरा को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं हरे – हरे चारे की चाह मे आवारा मवेशी खेतों मे उतर कर अपने पैरों से रौद दे रहे हैं । जिस कारण किसान वर्ग काफी परेशान हैं ।
ग्रामीण जनप्रतिनिधियों के पहल से हर वर्ष आवारा गौवशों को जंगलों मे छोड़ा जाता है लेकिन वे पुनः गाँवों की ओर लौट आते हैं ।
किसानों की समस्या और गौवशों के सड़कों पर एकत्रीकरण से निजात दिलाने प्रशासन भी अब तक कोई ठोस उपाय नहीं कर पाई है । परिणामस्वरूप खेतीबाड़ी का सीजन शुरु होते ही ग्रामीण सहित शहरी क्षेत्रों सड़क , चौक , चौराहे मे गौवशों के विचरण की समस्या बढ़ जाती है जिस कारण सबसे ज्यादा परेशानी किसान वर्ग को हो रही है ।
